ईरान के साथ चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति में अमेरिकी प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप के द्वारा लगाए गए इमरजेंसी टैरिफ को गैरकानूनी घोषित किया गया, जिससे सरकार को लगभग 166 बिलियन डॉलर (करीब 14 लाख करोड़ रुपये) के टैरिफ रिफंड करने पड़ेंगे। US Customs and Border Protection ने कोर्ट में बताया कि 45 दिनों में एक ऑटोमेटेड सिस्टम तैयार हो जाएगा, जिससे 3.3 लाख से ज्यादा इंपोर्टर्स को बिना मुकदमे के रिफंड मिल सकेगा। यह राशि 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट्स पर वसूली गई थी और अब ब्याज सहित लौटाई जाएगी, जबकि ईरान युद्ध की लागत 210 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।
ट्रंप ईरान युद्ध के बीच टैरिफ से वसूली रकम लौटाने की तैयारी में, कैसे लौटाएंगे 166 बिलियन डॉलर; प्लान आया सामने
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए व्यापक टैरिफ अब बड़े संकट में हैं। ईरान के साथ बढ़ते सैन्य टकराव के बीच सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इन टैरिफ को असंवैधानिक करार दिया था, क्योंकि ये International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए थे। कोर्ट के आदेश के बाद अब US Customs and Border Protection (CBP) ने रिफंड प्रक्रिया का प्लान कोर्ट में पेश किया है।
CBP के वरिष्ठ अधिकारी Brandon Lord ने US Court of International Trade में दाखिल दस्तावेज में कहा कि कुल वसूली गई राशि लगभग 166 बिलियन डॉलर है। यह राशि 330,000 से अधिक इंपोर्टर्स द्वारा 53 मिलियन से ज्यादा कस्टम एंट्रीज पर चुकाई गई थी। इनमें से 20.1 मिलियन एंट्रीज अभी अनलिक्विडेटेड हैं।
रिफंड प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए CBP एक नया ऑटोमेटेड सिस्टम विकसित कर रहा है, जो 45 दिनों में तैयार हो जाएगा। इस सिस्टम के जरिए इंपोर्टर्स को मिनिमल सबमिशन के साथ रिफंड मिल सकेगा, बिना हर शिपमेंट का मैनुअल रिव्यू किए। मैनुअल प्रोसेस अपनाने पर 4 मिलियन से ज्यादा घंटे लगते, जो असंभव था।
यह रिफंड ब्याज सहित होगा, जिससे कुल राशि और बढ़ सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी इंपोर्टर्स को फायदा मिलना चाहिए। अब तक 2,000 से ज्यादा कंपनियां रिफंड के लिए मुकदमे दाखिल कर चुकी हैं, लेकिन नया सिस्टम मुकदमेबाजी की जरूरत कम कर देगा।
ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। अनुमान है कि ईरान पर सैन्य कार्रवाई की कुल लागत 210 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। टैरिफ रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा अब रिफंड में चला जाएगा, जिससे ट्रंप की ट्रेड पॉलिसी पर सवाल उठ रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में रिफंड राशि 142 बिलियन से 175 बिलियन डॉलर तक बताई गई है, लेकिन CBP का आधिकारिक अनुमान 166 बिलियन डॉलर है।
ट्रंप प्रशासन ने पहले कहा था कि टैरिफ से मिले पैसे अमेरिकी नागरिकों को डिविडेंड या रिबेट के रूप में लौटाए जा सकते हैं, लेकिन अब कोर्ट के फैसले से स्थिति उलट गई है। नए टैरिफ बढ़ोतरी की भी चर्चा है, जैसे 10% से 15% तक, ताकि रेवेन्यू लॉस की भरपाई हो सके।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| कुल रिफंड राशि | लगभग 166 बिलियन डॉलर (ब्याज सहित अधिक हो सकती है) |
| प्रभावित इंपोर्टर्स | 330,000+ |
| कुल एंट्रीज | 53 मिलियन+ |
| अनलिक्विडेटेड एंट्रीज | 20.1 मिलियन |
| सिस्टम तैयार होने का समय | 45 दिन |
| कोर्ट का आदेश | सभी इंपोर्टर्स को रिफंड + ब्याज |
| युद्ध लागत अनुमान | 210 बिलियन डॉलर तक (ईरान संघर्ष) |
यह स्थिति ट्रंप की इकोनॉमिक स्ट्रैटेजी के लिए चुनौती बनी हुई है, जहां टैरिफ से मिले फंड अब वापस करने पड़ रहे हैं और युद्ध खर्च बढ़ रहा है। इंपोर्टर्स को जल्द राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन प्रक्रिया में देरी से बाजार प्रभावित हो सकता है।
Disclaimer: यह खबर विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और कोर्ट फाइलिंग्स पर आधारित है। इसमें कोई निवेश सलाह नहीं है।






