वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को बीमा और अन्य वित्तीय उत्पादों की मिस-सेलिंग पर कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने कहा कि बैंक अपने कोर बिजनेस—जमा जुटाना और कर्ज देना—पर फोकस करें, न कि ग्राहकों को अनावश्यक बीमा थोपने में समय बर्बाद करें। मिस-सेलिंग अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपराध है। आरबीआई ने मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिसमें मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरा रिफंड और नुकसान की भरपाई अनिवार्य होगी। ये नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
वित्त मंत्री की कड़ी चेतावनी और मिस-सेलिंग का पूरा मामला
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आरबीआई की सेंट्रल बोर्ड मीटिंग के बाद पत्रकारों से बातचीत में बैंकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बैंकों का ज्यादा समय बीमा उत्पाद बेचने में लग रहा है, जबकि उनका मुख्य काम जमा धन जुटाना और कर्ज देना है। सीतारमण ने इसे अपना ‘पेट पीव’ (सबसे बड़ी शिकायत) बताया और कहा कि ग्राहकों को होम लोन लेते समय पहले से पर्याप्त कोलेटरल होने पर भी अतिरिक्त इंश्योरेंस कवर क्यों थोपा जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मिस-सेलिंग अब सहन नहीं की जाएगी। यह भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत अपराध माना जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा, “बैंकों को संदेश जाना चाहिए कि वे मिस-सेल नहीं कर सकते।” उन्होंने आरबीआई के हालिया कदमों का स्वागत किया, जिसमें बैंकों को ग्राहकों की जरूरतों के अनुसार उत्पाद बेचने और भ्रामक प्रथाओं से दूर रहने की सलाह दी गई है।
आरबीआई ने 11 फरवरी 2026 को मिस-सेलिंग पर ड्राफ्ट दिशानिर्देश जारी किए थे। इनमें बैंकों को थर्ड-पार्टी उत्पादों (जैसे बीमा, म्यूचुअल फंड) की बिक्री में सख्ती बरतने को कहा गया है। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
मिस-सेलिंग साबित होने पर ग्राहक को उत्पाद की पूरी राशि रिफंड करनी होगी।
ग्राहक को हुए किसी भी नुकसान की भरपाई बैंक की मंजूर नीति के अनुसार की जाएगी।
‘डार्क पैटर्न्स’ (भ्रामक विज्ञापन या बिक्री तकनीक) पर रोक लगेगी।
बैंक स्टाफ को थर्ड-पार्टी उत्पाद बेचने के लिए इंसेंटिव नहीं मिलेंगे।
ग्राहकों को जबरन उत्पाद नहीं बेचे जा सकेंगे, जैसे लोन के साथ अनिवार्य बीमा।
ये दिशानिर्देश 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे। पब्लिक फीडबैक के लिए 4 मार्च तक समय दिया गया है।
मिस-सेलिंग के कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां ग्राहकों को उनकी जरूरत न होने पर भी बीमा पॉलिसी थोपी गई। उदाहरण के तौर पर, होम लोन लेने वाले ग्राहक को अतिरिक्त क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस या अन्य कवर खरीदने के लिए दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में ग्राहकों के पास पहले से बीमा कवर होता है, फिर भी नई पॉलिसी बेची जाती है। इससे ग्राहकों की उधार लागत बढ़ती है और भरोसा टूटता है।
सीतारमण ने कहा कि बैंकिंग सिस्टम में जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है। बैंकों को ग्राहक-केंद्रित रहना होगा, न कि कमीशन कमाने के चक्कर में अनावश्यक उत्पाद बेचने में। उन्होंने आरबीआई और आईआरडीए के बीच समन्वय की कमी पर भी टिप्पणी की, जिससे यह मामला लंबे समय से अटका रहा।
आरबीआई के इन कदमों से बैंकिंग सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ेगी। ग्राहक अब बिना दबाव के अपनी जरूरत के अनुसार उत्पाद चुन सकेंगे। बैंकों को अब कोर एक्टिविटीज पर फोकस करना होगा, जैसे जमा बढ़ाना और क्रेडिट विस्तार। इससे अर्थव्यवस्था में फंड फ्लो बेहतर होगा और ग्राहक संरक्षण मजबूत बनेगा।






