“आरबीआई ने रुपये की गिरावट रोकने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में 9.7 अरब डॉलर बेचे, जिससे करेंसी 91.70 के स्तर पर पहुंची। यह कदम लगातार छह सत्रों की गिरावट के बाद उठाया गया, जहां एफपीआई आउटफ्लो और ग्लोबल टेंशन ने दबाव बढ़ाया। इंटरवेंशन से स्पॉट मार्केट में स्थिरता आई, लेकिन आगे डिप्रिशिएशन का खतरा बरकरार है, जबकि आरबीआई के रिजर्व मजबूत बने हुए हैं।”
आरबीआई ने रुपये की लगातार गिरावट को थामने के लिए विदेशी मुद्रा बाजार में बड़े पैमाने पर हस्तक्षेप किया, जिसमें 9.7 अरब डॉलर की बिक्री शामिल है। यह इंटरवेंशन ऐसे समय में आया जब रुपया 91.7425 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया था, और क्लोजिंग पर 0.8% की गिरावट के साथ 91.6950 पर सेटल हुआ। reuters.com ग्लोबल मार्केट की अस्थिरता, एफपीआई द्वारा भारतीय इक्विटी से लगातार निकासी और बढ़ते जियोपॉलिटिकल टेंशन ने रुपये पर दबाव डाला, जिससे यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली करेंसी बन गई।
आरबीआई का यह कदम स्पॉट मार्केट में डॉलर बेचकर रुपये की वैल्यू को सपोर्ट करने का हिस्सा है, जो कि 91 लेवल को प्रोटेक्ट करने के उद्देश्य से उठाया गया। ट्रेडर्स के अनुसार, सेंट्रल बैंक ने स्टेट-रन बैंकों के माध्यम से डॉलर की सप्लाई बढ़ाई, जिससे इंट्राडे लो 91.05 तक सीमित रहा। m.economictimes.com पिछले कुछ महीनों में आरबीआई ने कुल 45 अरब डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं, जिसमें रिजर्व रेशियो कट, बॉन्ड परचेज और फॉरेक्स स्वैप शामिल हैं। इससे बैंकिंग सिस्टम में 14.5 ट्रिलियन रुपये की लिक्विडिटी इंजेक्ट हुई, जो कि डिप्रिशिएशन के असर को कम करने में मददगार साबित हुई।
रुपये की गिरावट के प्रमुख कारणों में एफपीआई द्वारा 29,300 करोड़ रुपये की सेलिंग शामिल है, जो कि 2026 के पहले 20 दिनों में ही हो चुकी है। business-standard.com ग्लोबल स्तर पर यूएस-यूरोप ट्रेड टेंशन और ऑयल कंट्रोल इश्यूज ने रिस्क एवर्शन बढ़ाया, जिससे इमर्जिंग मार्केट करेंसीज प्रभावित हुईं। रुपये ने जनवरी में 1.1% की गिरावट दर्ज की, जबकि पिछले साल यह 1.50% तक गिर चुका था। ट्रेडर्स का अनुमान है कि अगर इंटरवेंशन जारी रहा तो रुपया 92 के स्तर तक जा सकता है, लेकिन आरबीआई की पॉलिसी मार्केट को करेंसी लेवल तय करने की छूट देती है।
आरबीआई के इंटरवेंशन का प्रभाव: की पॉइंट्स
स्पॉट मार्केट सपोर्ट : 9.7 अरब डॉलर की बिक्री से रुपये में तत्काल रिकवरी देखी गई, जहां ओपनिंग पर 90.93 से गिरकर 91.01 तक पहुंचा लेकिन क्लोज पर स्टेबल रहा। thehindu.com
फॉरवर्ड मार्केट स्ट्रेटेजी : आरबीआई ने डॉलर/रुपये बाय-सेल स्वैप के जरिए लिक्विडिटी मैनेज की, जिसमें जनवरी 13 को 10 अरब डॉलर का ऑक्शन शामिल था। इससे फॉरवर्ड प्रीमियम कंप्रेस हुआ और डिप्रिशिएशन की स्पीड कंट्रोल हुई। thehindubusinessline.com
रिजर्व पोजीशन : आरबीआई के फॉरेक्स रिजर्व मजबूत हैं, जो कि इंटरवेंशन को सपोर्ट करते हैं। हालिया स्वैप से बैंकिंग लिक्विडिटी सरप्लस 735 बिलियन रुपये तक घटा, लेकिन ओवरऑल स्टेबिलिटी बनी रही। bloomberg.com
इकोनॉमिक इम्प्लिकेशंस : कमजोर रुपया एक्सपोर्ट्स को बूस्ट दे सकता है, लेकिन इम्पोर्ट्स महंगे हो सकते हैं, खासकर ऑयल और मेटल्स के लिए। ट्रेड डेफिसिट पर नजर रखने की जरूरत है।
मार्केट सेंटिमेंट : ट्रेडर्स का कहना है कि इंटरवेंशन केवल डिप्रिशिएशन की पेस कंट्रोल कर रहा है, न कि डायरेक्शन चेंज। आगे ग्रीनलैंड डिस्प्यूट जैसे इश्यूज असर डाल सकते हैं। tradingview.com
आरबीआई की स्ट्रेटेजी में फॉरवर्ड इंटरवेंशन का इस्तेमाल बढ़ा है, जहां स्पॉट सेल से होने वाली लिक्विडिटी टाइटनिंग को ऑफसेट किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, दिसंबर 2025 में 10 अरब डॉलर का स्वैप ऑक्शन किया गया, जो कि रुपये को 90.98 पर स्टेबल करने में मददगार रहा। forumias.com गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हालिया इंटरव्यू में कहा कि पॉलिसी कंसिस्टेंट है, और मार्केट ही करेंसी लेवल डिटर्मिन करेगा, लेकिन एक्सेसिव वोलेटिलिटी को कंट्रोल किया जाएगा।
रुपये की हालिया मूवमेंट: टेबल
| तारीख | ओपनिंगरेट(INR/USD) | क्लोजिंगरेट(INR/USD) | इंट्राडेलो | इंट्राडेहाई | बदलाव(%) |
|---|---|---|---|---|---|
| 20जनवरी2026 | 90.91 | 90.98 | 91.06 | 90.90 | -0.08 |
| 21जनवरी2026 | 91.05 | 91.37 | 91.58 | 91.05 | -0.39 |
| 19जनवरी2026 | 90.90 | 90.91 | 91.01 | 90.85 | -0.01 |
| 18जनवरी2026 | 90.85 | 90.90 | 90.95 | 90.80 | -0.06 |
| 17जनवरी2026 | 90.80 | 90.85 | 90.92 | 90.75 | -0.06 |
यह टेबल दर्शाती है कि रुपया लगातार छह सत्रों में गिरा, लेकिन आरबीआई के इंटरवेंशन से गिरावट की रफ्तार धीमी हुई। thequint.com आगे, अगर एफपीआई आउटफ्लो जारी रहा तो रुपया 91.70-92.00 जोन में जा सकता है, जब तक कि सक्रिय इंटरवेंशन न हो।
ग्लोबल फैक्टर्स और भारतीय इकोनॉमी पर असर
ग्लोबल टेंशन, जैसे यूएस-यूरोप ट्रेड इश्यूज और ग्रीनलैंड डिस्प्यूट, ने डॉलर डिमांड बढ़ाई, जिससे रुपये पर प्रेशर पड़ा। taxtmi.com भारतीय इकोनॉमी में, कमजोर रुपया एक्सपोर्टर्स के लिए फायदेमंद है, लेकिन इम्पोर्ट बिल बढ़ा सकता है, खासकर क्रूड ऑयल के लिए। आरबीआई ने रिजर्व रेशियो कट से लिक्विडिटी बढ़ाई, जो कि 2.6 ट्रिलियन रुपये से घटकर 735 बिलियन पर आ गई। ट्रेडर्स का अनुमान है कि आरबीआई आगे भी माइल्ड इंटरवेंशन जारी रखेगा, ताकि डिप्रिशिएशन ग्रेजुअल रहे।
आरबीआई की पिछली इंटरवेंशंस में अक्टूबर में 11.88 अरब डॉलर बेचे गए, जो कि रुपये को तेज गिरावट से बचाने में सफल रहे। linkedin.com अब, 9.7 अरब डॉलर की यह सेल इसी स्ट्रेटेजी का हिस्सा है, जो कि स्पॉट और फॉरवर्ड दोनों मार्केट्स में बैलेंस बनाती है। इससे न केवल करेंसी स्टेबल होती है, बल्कि इकोनॉमिक ग्रोथ पर नेगेटिव इम्पैक्ट कम होता है।
आरबीआई की फ्यूचर स्ट्रेटेजी: अनुमान
स्वैप ऑक्शंस : आगे 3-ईयर स्वैप्स से लिक्विडिटी इंजेक्ट की जा सकती है, जैसे दिसंबर 2025 में हुआ।
रेट कट्स : अगर डिप्रिशिएशन बढ़ा तो रिजर्व रेशियो में और कट्स हो सकते हैं।
मार्केट मॉनिटरिंग : जियोपॉलिटिकल रिस्क्स पर नजर, ताकि एक्सट्रीम वोलेटिलिटी से बचा जा सके।
एक्सपोर्ट बूस्ट : कमजोर रुपया आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल सेक्टर्स को फायदा दे सकता है।
र ि स ् क ् स : अगर ग्लोबल डॉलर स्ट्रेंथ बढ़ी तो आगे इंटरवेंशन की जरूरत पड़ेगी।
यह इंटरवेंशन रुपये को तत्काल राहत देता है, लेकिन लॉन्ग-टर्म में ग्लोबल फैक्टर्स पर निर्भर करेगा। ट्रेडर्स सलाह देते हैं कि हेजिंग के जरिए कॉरपोरेट्स रिस्क मैनेज करें, जबकि इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि रियल इफेक्टिव एक्सचेंज रेट कंपेटिटिव रखने से एक्सपोर्ट्स बढ़ेंगे।
Disclaimer: यह समाचार रिपोर्ट है, विभिन्न स्रोतों पर आधारित, कोई निवेश सलाह या टिप्स नहीं।






