मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने से शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों के एक दिन में डूबे ₹10 लाख करोड़; Sensex-Nifty धड़ाम

By Ravi Singh

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मिडिल ईस्ट तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में
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“मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष से वैश्विक बाजारों में हड़कंप मचा, जिसके असर से भारतीय शेयर बाजार बुधवार को भी लाल निशान में रहा। सेंसेक्स 1,122 अंक टूटकर 79,116 पर और निफ्टी 385 अंक गिरकर 24,480 पर बंद हुआ। निवेशकों की संपत्ति में एक दिन में करीब 10 लाख करोड़ रुपये की भारी गिरावट आई, जबकि क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल से महंगाई की आशंका बढ़ गई है।”

मिडिल ईस्ट संकट से शेयर बाजार में भारी गिरावट

मिडिल ईस्ट में तेज होते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय शेयर बाजार को बुरी तरह प्रभावित किया है। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए, जिसमें सेंसेक्स 1,122.66 अंक यानी 1.40% की गिरावट के साथ 79,116.19 पर और निफ्टी 385.20 अंक यानी 1.55% नीचे 24,480.50 पर पहुंच गया। दिन के दौरान सेंसेक्स 1,795 अंक तक टूटा और निफ्टी 560 अंक तक लुढ़का, जो छह महीने का निचला स्तर है।

इस गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर बढ़ते हमले हैं, जिसके जवाब में ईरान ने गल्फ क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की। इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित हुई, जिसने क्रूड ऑयल की आपूर्ति पर गंभीर खतरा पैदा कर दिया। ब्रेंट क्रूड 4.7% उछलकर 81.40 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि WTI क्रूड 74.56 डॉलर पर बंद हुआ। यह स्तर जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम है।

बाजार में ब्रॉड-बेस्ड सेलिंग देखी गई। 16 प्रमुख सेक्टरों में से 15 लाल निशान में रहे। स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स में 2.1% से 2.2% की गिरावट दर्ज हुई। रियल्टी, मीडिया, ऑयल एंड गैस, पेंट्स, टायर्स, एविएशन और केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, क्योंकि इनमें कच्चे तेल की लागत सीधे असर डालती है। वहीं, अपस्ट्रीम ऑयल कंपनियां जैसे ONGC और Oil India में बेहतर रियलाइजेशन की उम्मीद से कुछ मजबूती दिखी। डिफेंस स्टॉक्स जैसे HAL और BEL में सकारात्मक सेंटीमेंट रहा।

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निवेशकों की संपत्ति में एक दिन में लगभग 9.93 लाख करोड़ रुपये से 10 लाख करोड़ रुपये तक की कमी आई, जिससे बीएसई लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन घटकर 447 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यह गिरावट पिछले तीन सत्रों में कुल 4% की है। रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, जबकि बॉन्ड में भी गिरावट आई।

वैश्विक बाजारों में भी यही रुख रहा। एशियाई बाजार 4.1% तक टूटे, जिसमें साउथ कोरिया में रिकॉर्ड क्रैश देखा गया। अमेरिकी बाजारों में भी डाउ, S&P 500 और नैस्डैक में 0.8% से 1% की गिरावट आई, हालांकि शुरुआती नुकसान से कुछ रिकवरी हुई।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहा तो भारत की जीडीपी पर 0.5% तक असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी 55% क्रूड जरूरत मिडिल ईस्ट से पूरी करता है। साथ ही, महंगाई बढ़ने से रेट कट में देरी की आशंका है, जो निवेशकों की रिस्क ऐपेटाइट को और कमजोर कर रही है। FII आउटफ्लो भी तेज हुआ है।

सेक्टोरल प्रभाव

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां : हाई इनपुट कॉस्ट से मार्जिन पर दबाव।

एविएशन और ट्रांसपोर्ट : फ्यूल खर्च बढ़ने से नुकसान।

केमिकल और पेंट्स : कच्चे तेल पर निर्भरता से गिरावट।

डिफेंस : जियोपॉलिटिकल रिस्क से पॉजिटिव सेंटीमेंट।

ऑयल एक्सप्लोरेशन : बेहतर रेवेन्यू की उम्मीद।

यह संकट भारत के लिए दोहरा झटका है – ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा और आर्थिक विकास की रफ्तार पर ब्रेक। बाजार में अगले सत्रों में अस्थिरता बनी रह सकती है, जब तक स्थिति में कोई डी-एस्केलेशन नहीं होता।

Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और बाजार रुझानों पर आधारित है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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