इसी साल शुरू होगा रेयर अर्थ मैग्नेट का उत्पादन, मंत्री ने खुद कर दिया एलान; चीन पर निर्भरता कम होगी

By Ravi Singh

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भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट उत्पादन शुरू होने की घोषणा, केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी द्वारा एलान
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“केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने घोषणा की है कि भारत इसी साल के अंत तक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) का घरेलू उत्पादन शुरू कर देगा। यह कदम इलेक्ट्रिक वाहनों, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता बढ़ाएगा तथा चीन से आयात पर निर्भरता को काफी हद तक घटाएगा। सरकार ने नवंबर 2025 में 7,280 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की थी, जिसके तहत 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की एकीकृत क्षमता विकसित की जाएगी। भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रेयर अर्थ भंडार वाला देश है, लेकिन अब तक निकासी और प्रसंस्करण सीमित था।”

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट उत्पादन: भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि भारत इस साल के अंत तक रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट का उत्पादन शुरू कर देगा। यह उत्पादन निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में होगा, जिसमें खान मंत्रालय और एक राज्य स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा विकसित तकनीक का उपयोग किया जाएगा।

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के मोटर, विंड टरबाइन, हार्ड डिस्क ड्राइव, स्पीकर, मेडिकल इक्विपमेंट और रक्षा उपकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये मैग्नेट नेोडिमियम, प्रेसियोडिमियम जैसे दुर्लभ तत्वों से बनते हैं, जिनमें से वैश्विक आपूर्ति का 80-90% हिस्सा चीन के पास है। भारत की मांग 2030 तक दोगुनी होने की संभावना है, जिसके कारण घरेलू उत्पादन रणनीतिक रूप से जरूरी हो गया है।

सरकार ने नवंबर 2025 में कैबिनेट से 7,280 करोड़ रुपये की ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ को मंजूरी दी थी। इस योजना के तहत:

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कुल 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) की एकीकृत क्षमता स्थापित की जाएगी।

वैल्यू चेन पूरी तरह कवर होगी – रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर फिनिश्ड मैग्नेट तक।

6,450 करोड़ रुपये सेल्स-लिंक्ड इंसेंटिव के रूप में 5 वर्षों के लिए दिए जाएंगे।

750 करोड़ रुपये कैपिटल सब्सिडी के तौर पर उत्पादन सुविधाओं के लिए।

क्षमता 5 लाभार्थियों को आवंटित की जाएगी, प्रत्येक को अधिकतम 1,200 MTPA तक।

योजना की कुल अवधि 7 वर्ष होगी, जिसमें 2 वर्ष की प्रोडक्शन पूर्व तैयारी शामिल है।

भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेयर अर्थ रिजर्व है – लगभग 6.9 मिलियन टन (US Geological Survey के अनुसार)। लेकिन निजी निवेश की कमी और तकनीकी चुनौतियों के कारण निकासी सीमित रही है। अब चार राज्यों – ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु – में डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई है। ये कॉरिडोर खनन, प्रसंस्करण, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को एक साथ बढ़ावा देंगे।

इसके अलावा, चार अलग-अलग राज्यों में क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग सुविधाएं स्थापित करने की योजना है। ये कदम सप्लाई चेन को मजबूत करेंगे और भू-राजनीतिक जोखिमों से बचाव करेंगे, क्योंकि चीन ने अतीत में रेयर अर्थ निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं।

मुख्य लाभ और प्रभाव

आत्मनिर्भरता : EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में आयात निर्भरता लगभग शून्य हो सकती है।

रोजगार सृजन : मैन्युफैक्चरिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स से हजारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष नौकरियां।

रणनीतिक महत्व : रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक मजबूत होगी, जहां मैग्नेट मिसाइल गाइडेंस और रडार सिस्टम में जरूरी हैं।

पर्यावरणीय फायदा : लोकल प्रोडक्शन से ग्लोबल ट्रांसपोर्टेशन उत्सर्जन कम होगा।

आर्थिक प्रभाव : 2030 तक मांग दोगुनी होने से घरेलू उत्पादन से विदेशी मुद्रा बचत होगी।

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यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान और नेट जीरो 2070 लक्ष्य से जुड़ी है। निजी क्षेत्र की भागीदारी से तकनीक ट्रांसफर और स्केल-अप तेज होगा।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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