जनवरी 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड में नेट इनफ्लो 14% घटकर ₹24,028 करोड़ रह गया, जो दिसंबर 2025 के ₹28,054 करोड़ से काफी कम है। साल-दर-साल आधार पर यह गिरावट 39% तक पहुंच गई। निवेशक वैश्विक अस्थिरता, बाजार में वैल्यूएशन की चिंता और मिड-स्मॉलकैप सेक्टर में ठंडक के कारण सतर्क हुए हैं, जबकि गोल्ड ETF में रिकॉर्ड ₹24,040 करोड़ का प्रवाह आया जो इक्विटी से भी ज्यादा है। एसआईपी फ्लो स्थिर रहा, लेकिन लंपसम निवेश में कमी आई। कुल इंडस्ट्री AUM बढ़कर ₹81.01 लाख करोड़ हो गया।
इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश क्यों ठंडा पड़ गया?
जनवरी 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम्स में नेट इनफ्लो में स्पष्ट मंदी देखी गई। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, महीने भर में सिर्फ ₹24,028 करोड़ का नया पैसा आया, जो पिछले महीने दिसंबर 2025 के ₹28,054 करोड़ से 14% कम है। यह लगातार दूसरा महीना है जब इक्विटी फंड में मासिक आधार पर गिरावट दर्ज हुई। सालाना आधार पर देखें तो जनवरी 2025 के ₹39,687 करोड़ की तुलना में यह आंकड़ा 39% नीचे है।
इस गिरावट की मुख्य वजह वैश्विक बाजारों में बढ़ती अस्थिरता है। अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक मंदी की आशंका ने निवेशकों का रिस्क ऐपेटाइट कम किया। भारतीय शेयर बाजार में भी जनवरी में मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में सुधार की कमी देखी गई, जिससे हाई-बीटा कैटेगरी में निवेश और कम हुआ।
कैटेगरी-वाइज इनफ्लो में बड़ा बदलाव
विभिन्न इक्विटी सब-कैटेगरी में मिश्रित रुझान दिखा:
फ्लेक्सी कैप फंड सबसे ज्यादा आकर्षक रहे और ₹7,672 करोड़ का इनफ्लो मिला। ये फंड निवेशकों को लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में लचीले एलोकेशन की सुविधा देते हैं, इसलिए अनिश्चितता में पसंद किए गए।
लार्ज कैप फंड में भी सुधार आया और इनफ्लो ₹2,005 करोड़ रहा, जो दिसंबर के ₹1,567 करोड़ से ज्यादा है।
फोकस्ड फंड में 47% की तेजी आई और इनफ्लो ₹1,556 करोड़ तक पहुंचा।
मिडकैप और स्मॉलकैप फंड में सबसे ज्यादा ठंडक रही। मिडकैप में 24% और स्मॉलकैप में 23% की गिरावट दर्ज हुई। हाई वैल्यूएशन और प्रॉफिट बुकिंग ने इन सेगमेंट में नए निवेश को रोका।
गोल्ड ETF ने इक्विटी को पीछे छोड़ा
जनवरी में निवेशकों ने रिस्क से बचने के लिए गोल्ड की तरफ रुख किया। गोल्ड ETF में नेट इनफ्लो 106% बढ़कर ₹24,040 करोड़ हो गया, जो दिसंबर के ₹11,647 करोड़ से दोगुना है। सिल्वर ETF में भी ₹9,463 करोड़ का प्रवाह आया। कुल गोल्ड-सिल्वर ETF में ₹33,503 करोड़ आए, जो इक्विटी सेगमेंट के बराबर या उससे ज्यादा है। यह पहली बार हुआ जब गोल्ड ETF का मासिक इनफ्लो इक्विटी के बराबर पहुंचा।
एसआईपी में स्थिरता, लेकिन लंपसम में कमी
सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) ने मजबूती दिखाई। जनवरी में मासिक SIP कंट्रीब्यूशन ₹31,002 करोड़ पर स्थिर रहा। योगदान देने वाले SIP अकाउंट्स की संख्या बढ़कर 9.92 करोड़ हो गई। हालांकि SIP एसेट्स में मामूली गिरावट आई और ₹16.36 लाख करोड़ रह गए, जो मार्केट करेक्शन के कारण MTM लॉस से हुआ।
लंपसम निवेश में कमी आई, जिससे कुल इक्विटी इनफ्लो प्रभावित हुआ। निवेशक अब अनिश्चितता में बड़े एकमुश्त निवेश से बच रहे हैं और SIP के जरिए डिसिप्लिन्ड अप्रोच अपना रहे हैं।
डेट और हाइब्रिड फंड में रिकवरी
डेट फंड में जनवरी में मजबूत वापसी हुई। नेट इनफ्लो ₹74,827 करोड़ रहा, जो नवंबर-दिसंबर में ₹1.58 लाख करोड़ के आउटफ्लो के बाद राहत वाली खबर है। हाइब्रिड फंड में भी ₹17,356 करोड़ आए। इससे कुल इंडस्ट्री नेट इनफ्लो ₹1.56 लाख करोड़ रहा।
इंडस्ट्री AUM में बढ़ोतरी जारी
पूरे म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM जनवरी में 1% बढ़कर ₹81.01 लाख करोड़ हो गया। कुल फोलियो 26.63 करोड़ पहुंचे, जिसमें 50.6 लाख नए फोलियो जुड़े। इक्विटी स्कीम्स में लगभग 18 करोड़ फोलियो हैं। रिटेल AUM इक्विटी, हाइब्रिड और सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स में ₹46.49 लाख करोड़ रहा।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
यह गिरावट स्ट्रक्चरल कमजोरी नहीं दिखाती, बल्कि शॉर्ट-टर्म सतर्कता है। लॉन्ग-टर्म में भारतीय इक्विटी की ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी हुई है। निवेशक अब डाइवर्सिफिकेशन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं – इक्विटी के साथ गोल्ड और डेट में बैलेंस बना रहे हैं। SIP जारी रखना सबसे सुरक्षित रणनीति बनी हुई है, क्योंकि यह मार्केट के उतार-चढ़ाव को औसत करती है।






