JSW Steel का बड़ा दांव! मोजांबिक में 85 करोड़ टन कोयले की खदान हासिल, स्टील उत्पादन लागत में बड़ी कटौती का प्लान

By Ravi Singh

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JSW Steel का मोजांबिक में Minas de Revuboè कोकिंग कोल माइन प्रोजेक्ट, 85 करोड़ टन रिजर्व वाली खदान का विकास
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JSW Steel ने मोजांबिक के मोआतिजे कोल बेसिन में Minas de Revuboè (MdR) प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें कुल 850 मिलियन टन (85 करोड़ टन) कोयला रिजर्व हैं और इससे करीब 250 मिलियन टन usable प्रीमियम हार्ड कोकिंग कोल मिल सकता है। कंपनी पहले फेज में 2.5 साल में 2.4 मिलियन टन प्रति वर्ष उत्पादन का लक्ष्य रख रही है, जो भारत की 85% कोकिंग कोल आयात निर्भरता को कम करने और वैश्विक मूल्य अस्थिरता से बचाव में मदद करेगा। यह कदम JSW की 2030 तक 50 मिलियन टन स्टील क्षमता के लक्ष्य को मजबूत बनाता है।

JSW Steel का मोजांबिक में कोकिंग कोल माइनिंग प्रोजेक्ट शुरू

JSW Steel ने मोजांबिक के टेटे प्रांत में स्थित Minas de Revuboè (MdR) कोकिंग कोल माइनिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। यह प्रोजेक्ट मोआतिजे कोल बेसिन में है, जो कंपनी की बैकवर्ड इंटीग्रेशन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। MdR में कुल 850 मिलियन टन कोयला रिजर्व हैं, जिनमें से लगभग 250 मिलियन टन usable प्रीमियम हार्ड कोकिंग कोल निकाला जा सकता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला कोकिंग कोल स्टील उत्पादन के लिए आवश्यक ब्लास्ट फर्नेस में इस्तेमाल होता है।

प्रोजेक्ट को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा। पहले फेज में अगले 2.5 वर्षों में 2.4 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) प्राइम हार्ड कोकिंग कोल का उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य है। खदान टेटे शहर से मात्र 10 किमी उत्तर में स्थित है, बीरा पोर्ट से 450 किमी और नाकाला पोर्ट से 900 किमी दक्षिण-पश्चिम में। यह लोकेशन भारत के स्टील प्लांट्स के लिए लॉजिस्टिक्स के लिहाज से सबसे फायदेमंद में से एक है, क्योंकि परिवहन लागत कम रहेगी।

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JSW Steel भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्टील उत्पादक देश होने के बावजूद कोकिंग कोल की 85% जरूरत आयात से पूरी करता है, मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया से। वैश्विक बाजार में कोकिंग कोल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से स्टील उत्पादन लागत पर सीधा असर पड़ता है। MdR प्रोजेक्ट से कंपनी लंबे समय तक स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित कर सकेगी और मूल्य अस्थिरता से बचाव होगा। इससे स्टील उत्पादन की कुल लागत में कमी आएगी, जो कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाएगा।

यह प्रोजेक्ट JSW की 2030 तक भारत में 50 मिलियन टन प्रति वर्ष स्टील क्षमता हासिल करने के लक्ष्य से जुड़ा है। कंपनी पहले से ही अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका में कोयला संपत्तियां संचालित कर रही है, लेकिन मोजांबिक वाला यह एसेट अफ्रीका में प्रीमियम हार्ड कोकिंग कोल का बड़ा स्रोत बनेगा। परियोजना की शुरुआत समारोह में मोजांबिक के राष्ट्रपति डैनियल फ्रांसिस्को चापो ने हिस्सा लिया, जो भारत-मोजांबिक आर्थिक सहयोग का प्रतीक है।

प्रमुख विशेषताएं और लाभ

रिजर्व और उत्पादन क्षमता कुल रिजर्व: 850 मिलियन टन usable कोकिंग कोल पोटेंशियल: 250 मिलियन टन पहले फेज उत्पादन: 2.4 mtpa (2.5 वर्षों में) भविष्य में स्केल-अप: 5-7 mtpa तक संभावना

रणनीतिक महत्व भारत की कोकिंग कोल आयात निर्भरता (85%) कम होना वैश्विक मूल्य volatility से सुरक्षा लॉजिस्टिक्स लाभ: भारत के करीब पोर्ट कनेक्टिविटी लागत अनुकूलन: स्टील प्रति टन लागत में कमी

विकास चरण चरणबद्ध विकास से जोखिम कम पहले फेज पर फोकस: इंफ्रास्ट्रक्चर, ड्रिलिंग और प्रोडक्शन सेटअप पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के साथ संतुलन बनाए रखना

JSW Steel के जे एम डी पार्थ जिंदल ने इसे अफ्रीका में प्रीमियम कोकिंग कोल रिजर्व हासिल करने का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया है। यह कदम कंपनी को कच्चे माल की सुरक्षा देगा और भारत के स्टील सेक्टर को मजबूत बनाएगा। प्रोजेक्ट से न केवल JSW बल्कि पूरे भारतीय स्टील इंडस्ट्री को लंबे समय में फायदा होगा, क्योंकि यह आयात पर निर्भरता घटाएगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में योगदान देगा।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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