“भारतीय आईटी सेक्टर में AI के कारण भर्ती में भारी गिरावट आई है। FY 2025-26 के पहले नौ महीनों में TCS, Infosys, Wipro, HCLTech और Tech Mahindra जैसी टॉप पांच कंपनियों ने कुल मिलाकर सिर्फ 17 नेट हायरिंग की, जबकि पिछले साल इसी अवधि में 17,764 थी। TCS ने अकेले 25,816 कर्मचारियों की छंटनी की, जबकि AI ऑटोमेशन के चलते फ्रेशर्स और मिड-लेवल जॉब्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ रहा है।”
IT जॉब्स पर AI का खतरा: भर्ती ठप, ऑफर लेटर रुके
भारतीय आईटी इंडस्ट्री में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज फैलाव से जॉब मार्केट में बड़ा उलटफेर हो रहा है। जहां एक तरफ TCS जैसी दिग्गज कंपनी ने बड़े पैमाने पर छंटनी की है, वहीं Anand Mahindra की अगुवाई वाली Tech Mahindra (महिंद्रा ग्रुप की आईटी arm) ने भी भर्ती प्रक्रिया पर ब्रेक लगा दिया है। कई कैंडिडेट्स को इंटरव्यू और सिलेक्शन प्रोसेस पूरा करने के बाद भी ऑफर लेटर जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिससे फ्रेशर्स और एक्सपीरियंस्ड प्रोफेशनल्स में हताशा फैल गई है।
TCS ने FY26 में 2% वर्कफोर्स कम करने का ऐलान किया था, जिसके तहत करीब 12,000 से ज्यादा जॉब्स कटे। कंपनी ने मिड-लेवल और सीनियर एग्जीक्यूटिव्स पर फोकस किया, लेकिन इसका असर फ्रेशर हायरिंग पर भी पड़ा। TCS ने एक्सपीरियंस्ड हायरिंग फ्रीज कर दी और कई जगहों पर जॉइनिंग डिले या कैंसल की गईं। इसी तरह Tech Mahindra में भी सोशल मीडिया पर वायरल खबरों के बाद कंपनी ने स्पष्ट किया कि कोई मेजर लेऑफ प्लान नहीं है, लेकिन भर्ती में सख्ती बरती जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने कई कैंडिडेट्स को सिलेक्शन के बाद जॉइनिंग लेटर जारी नहीं किए, खासकर फ्रेशर्स और कुछ लेटरल हायर्स के लिए।
यह ट्रेंड सिर्फ इन दो कंपनियों तक सीमित नहीं है। भारतीय आईटी सेक्टर की टॉप पांच कंपनियों (TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Tech Mahindra) ने FY 2025-26 के पहले नौ महीनों में कुल 17 नेट एडिशन ही किए, जो पिछले साल की तुलना में 99.9% कम है। TCS की 25,816 की नेगेटिव ग्रोथ ने पूरे सेक्टर को ड्रैग किया, जबकि Infosys ने 13,456, Wipro ने 9,740 और HCLTech ने 1,885 जोड़े। Tech Mahindra ने सिर्फ 752 एडिशन दिखाए, जो AI ट्रांसफॉर्मेशन और क्लाइंट डिमांड में कमी का संकेत है।
AI के कारण जॉब्स पर असर
AI टूल्स अब कोड जनरेशन, टेस्टिंग, बेसिक सपोर्ट और यहां तक कि मिडिल मैनेजमेंट टास्क्स को ऑटोमेट कर रहे हैं। जेनरेटिव AI की वजह से कंपनियां कम लोगों से ज्यादा काम करा रही हैं। क्लाइंट्स डिस्क्रेशनरी स्पेंडिंग कम कर रहे हैं, जिससे प्रोजेक्ट्स घटे हैं। नतीजा: फ्रेशर्स के लिए कैंपस रिक्रूटमेंट में 30-40% कटौती, लेटरल हायरिंग में फ्रीज और कई सिलेक्शन के बाद ऑफर होल्ड या कैंसल।
कौन से रोल्स सबसे ज्यादा प्रभावित?
रूटीन कोडिंग और मेंटेनेंस जॉब्स
मैनुअल टेस्टिंग और सपोर्ट रोल्स
मिड-लेवल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट टास्क्स
किन स्किल्स की डिमांड बढ़ रही है?
कंपनियां अब AI, क्लाउड, साइबरसिक्योरिटी और स्पेशलाइज्ड डिजिटल रोल्स में हायरिंग कर रही हैं। TCS, Infosys और Tech Mahindra AI पार्टनरशिप्स (जैसे OpenAI, Anthropic) के जरिए नए प्रोजेक्ट्स ला रही हैं, लेकिन ये हाई-स्किल्ड टैलेंट चाहती हैं।
फ्रेशर्स के लिए सलाह
AI/ML, जेनरेटिव AI, डेटा साइंस में सर्टिफिकेशन लें।
प्रोजेक्ट्स में GenAI टूल्स (जैसे GitHub Copilot) का इस्तेमाल दिखाएं।
क्लाउड (AWS, Azure) और सिक्योरिटी स्किल्स पर फोकस करें।
स्टार्टअप्स, GCCs (Global Capability Centers) और प्रोडक्ट कंपनियों में अप्लाई करें, जहां डिमांड ज्यादा है।
सेक्टर का भविष्य
एक्सपर्ट्स का मानना है कि AI से कुछ जॉब्स खत्म होंगे, लेकिन नए रोल्स भी बनेंगे। Anand Mahindra ने खुद कहा है कि AI से आईटी जॉब्स के खत्म होने की अफवाहें बढ़ा-चढ़ाकर पेश की जा रही हैं। कंपनियां आउटकम-बेस्ड मॉडल्स पर शिफ्ट हो रही हैं, जहां स्किल्ड वर्कफोर्स की वैल्यू बढ़ेगी। लेकिन अगले 2-3 साल ट्रांजिशन पीरियड कठिन रह सकता है।
Disclaimer: यह लेख उपलब्ध रियल-टाइम ट्रेंड्स, इंडस्ट्री रिपोर्ट्स और हालिया घटनाक्रम पर आधारित है। यह सामान्य जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत करियर सलाह नहीं।






