भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता जनवरी 2026 में पूरी हुई, जिसके ड्राफ्ट टेक्स्ट में दोनों पक्षों ने 5 साल के लिए एक-दूसरे को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा देने पर सहमति जताई है। इससे भारतीय निर्यात को 99.5% ट्रेड वैल्यू पर ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, जबकि EU को भारत में 96.6% पर टैरिफ कटौती का फायदा होगा। समझौता 20 चैप्टर्स वाला आधुनिक पैक्ट है, जिसमें डिजिटल ट्रेड, सर्विसेज और IP जैसे क्षेत्र शामिल हैं, जो भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टरों को बूस्ट देगा और कुल मिलाकर दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार दोगुना होने की उम्मीद है।
भारत-EU FTA: यूरोप में बजेगा भारत का डंका! मिला खास दर्जा, 5 साल के लिए हुए ये बड़े समझौते
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का मसौदा जारी होने के साथ ही दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को 5 साल के लिए मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का विशेष दर्जा देने का फैसला किया है। यह प्रावधान समझौते के लागू होने की तारीख से प्रभावी होगा और WTO नियमों के अनुरूप दोनों को बेहतर टैरिफ शर्तों से बांधेगा। इससे कोई भी पक्ष अगले 5 सालों में तीसरे देश को ऐसी छूट नहीं दे सकेगा जो इस FTA के तहत नहीं दी गई हो।
यह समझौता जनवरी 2026 में नई दिल्ली में संपन्न उच्च स्तरीय वार्ता के बाद अंतिम रूप लिया गया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय काउंसिल के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने इसे साझा समृद्धि का नया ब्लूप्रिंट बताया। लगभग दो दशकों की कठिन वार्ताओं (2007 से शुरू, 2013 में रुकीं और 2022 में फिर शुरू) के बाद यह ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में उभरा है।
मुख्य लाभ और टैरिफ कटौती की डिटेल्स
EU भारत के निर्यात को 99.5% ट्रेड वैल्यू पर प्राथमिकता देगा, जिसमें 93% से अधिक भारतीय निर्यात ड्यूटी-फ्री प्रवेश पाएंगे। अधिकांश टैरिफ लाइंस पर शुल्क तुरंत या अधिकतम 7 सालों में शून्य हो जाएगा। भारत की ओर से EU निर्यात को 96.6% ट्रेड वैल्यू पर टैरिफ कम या खत्म किया जाएगा, जिसमें 96% सामानों पर 10 साल तक चरणबद्ध कटौती होगी।
EU कंपनियों को सालाना 4 बिलियन यूरो (लगभग 4.7 बिलियन डॉलर) की ड्यूटी बचत होगी, जबकि 2032 तक EU का भारत में निर्यात दोगुना होने का अनुमान है।
सेक्टर-विशेष फायदे
टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर : तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस से लाखों रोजगार बढ़ेंगे।
जेम्स एंड ज्वेलरी, स्पोर्ट्स गुड्स, टॉयज : बड़े बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त।
टी, कॉफी, स्पाइसेस और मैरिन प्रोडक्ट्स : लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों को मजबूती।
ऑटोमोबाइल : भारत में EU लग्जरी कारों पर टैरिफ 110% से घटकर 10% (कोटा आधारित)।
फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, केमिकल्स : चरणबद्ध छूट से आयात सस्ता।
संवेदनशील क्षेत्र जैसे डेयरी, चावल, चीनी और बीफ को बाहर रखा गया है ताकि स्थानीय किसानों के हित सुरक्षित रहें।
सर्विसेज और अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
सर्विसेज सेक्टर में भारत को MFN ट्रीटमेंट मिलेगा, जिसमें फाइनेंशियल, टेलीकॉम, प्रोफेशनल सर्विसेज और मोबिलिटी शामिल हैं। 5 साल बाद रिव्यू होगा, जिसमें भारतीय छात्रों की एंट्री, स्टे, वर्क राइट्स और सोशल सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स पर विचार होगा।
डिजिटल ट्रेड चैप्टर में क्रॉस-बॉर्डर डेटा फ्लो पर नियम, लेकिन प्राइवेसी प्रोटेक्शन को प्राथमिकता। डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन में मॉडल मीडिएशन प्रोसीजर्स शामिल हैं। समझौते में कुल 20 चैप्टर्स हैं, जिसमें IP, इन्वेस्टमेंट और रेगुलेटरी कोऑपरेशन भी कवर हैं।
MFN दर्जे का मतलब और प्रभाव
MFN का मतलब है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे को किसी तीसरे देश से बेहतर या बराबर टैरिफ और शर्तें देंगे। यह WTO गार्डरेल्स को मजबूत करेगा और नए इंपोर्ट-एक्सपोर्ट रेस्ट्रिक्शंस से बचाएगा। 5 साल बाद रिव्यू से आगे की प्रतिबद्धता तय होगी।
यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में मजबूत स्थिति देगा, खासकर जब वैश्विक स्तर पर ट्रेड टेंशन्स बढ़ रही हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोप का विशाल बाजार (27 देश, 2 अरब लोगों का फ्री ट्रेड जोन) खुलने से आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध जानकारी और रिपोर्ट्स पर आधारित है। समझौता अभी रैटिफिकेशन और लीगल वेटिंग के चरण में है, अंतिम प्रभाव लागू होने के बाद स्पष्ट होंगे।






