“भारत में राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर साल हजारों जानें जाती हैं, लेकिन सही ड्राइविंग आदतें अपनाकर आप खुद को और परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं। ओवरस्पीडिंग, गलत लेन यूज और थकान जैसे कारणों से होने वाले हादसों को इन 5 टिप्स से काफी हद तक रोका जा सकता है।”
हाईवे पर गाड़ी चलाने का सही तरीका
भारत में राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे तेज गति के लिए बने हैं, लेकिन ये सबसे खतरनाक सड़कें भी हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग केवल कुल सड़कों के 2% हैं, लेकिन इन पर होने वाली मौतों का हिस्सा 35-36% तक पहुंच जाता है। 2025 में राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुल दुर्घटनाएं 1,34,307 रहीं, जबकि मौतों की संख्या 57,482 दर्ज की गई, जो पिछले साल से 11% कम है, लेकिन अभी भी हर घंटे कई जानें जाती हैं। ओवरस्पीडिंग 70% से ज्यादा घातक हादसों की वजह बनती है, जबकि थकान, डिस्ट्रैक्शन और लेन अनुशासन की कमी अन्य प्रमुख कारण हैं।
हाईवे पर सुरक्षित ड्राइविंग के लिए इन 5 प्रमुख टिप्स को अपनाएं:
सही स्पीड और सुरक्षित दूरी बनाए रखें हाईवे पर स्पीड लिमिट का सख्ती से पालन करें। सामान्यतः कारों के लिए 100-120 किमी/घंटा और हेवी वाहनों के लिए कम। सबसे महत्वपूर्ण है 3-सेकंड रूल अपनाना। आगे चल रहे वाहन के किसी फिक्स्ड पॉइंट (जैसे पोल या साइन) से गुजरने के बाद कम से कम 3 सेकंड तक अपना वाहन उस पॉइंट तक न पहुंचे। बारिश या फॉग में इसे 5-6 सेकंड तक बढ़ाएं। इससे रियर-एंड कोलिजन से बचा जा सकता है, जो हाईवे पर आम है। याद रखें, ब्रेक लगाने पर भी गाड़ी 100 किमी/घंटा स्पीड से 70-80 मीटर तक जा सकती है।
लेन अनुशासन का पालन करें और ब्लाइंड स्पॉट चेक करें हाईवे पर लेन बदलना आसान लगता है, लेकिन गलत लेन यूज से हेड-ऑन या साइड स्वाइप हादसे होते हैं। हमेशा बाईं लेन में रहें अगर आप धीमे चल रहे हैं, जबकि तेज गाड़ियों के लिए मिडिल या राइट लेन यूज करें। लेन बदलते समय मिरर चेक के साथ ब्लाइंड स्पॉट (ओवर-द-शोल्डर चेक) जरूर करें। इंडिकेटर का इस्तेमाल 3-4 सेकंड पहले करें। गलत दिशा में चलने वाले ट्रैक्टर या लोकल वाहनों से सावधान रहें, जो हाईवे पर अचानक आ जाते हैं।
थकान और डिस्ट्रैक्शन से बचें, नियमित ब्रेक लें लंबी दूरी पर ड्राइविंग करते समय हर 2 घंटे में कम से कम 10-15 मिनट का ब्रेक लें। थकान से रिएक्शन टाइम बढ़ जाता है और माइक्रो-स्लीप हो सकता है। मोबाइल फोन बिल्कुल न यूज करें – हैंड्स-फ्री भी डिस्ट्रैक्शन बढ़ाता है। अगर नींद आ रही है तो सुरक्षित जगह पर रुकें। रात में ड्राइविंग से बचें या साथ में कोई हो तो ड्राइवर बदलें। हाल के अभियानों में भी थकान को प्रमुख कारण बताया गया है।
सीटबेल्ट, हेलमेट और वाहन की जांच पहले करें हाईवे पर हाई स्पीड होने से छोटी टक्कर भी घातक हो सकती है। ड्राइवर और फ्रंट पैसेंजर के लिए सीटबेल्ट अनिवार्य है – इससे मौत का खतरा 50% तक कम होता है। दोपहिया वालों के लिए हेलमेट पहनना जरूरी। ड्राइविंग से पहले टायर प्रेशर, ब्रेक, लाइट्स, वाइपर और फ्लूइड लेवल चेक करें। ओवरलोडिंग या खराब वाहन से हादसे बढ़ते हैं। इमरजेंसी किट (फर्स्ट एड, ट्राएंगल, स्पेयर टायर) साथ रखें।
ट्रैफिक साइन, मौसम और अन्य वाहनों पर नजर रखें हाईवे पर साइन बोर्ड, स्पीड लिमिट और एग्जिट इंडिकेटर को इग्नोर न करें। फॉग, बारिश या धूप में विजिबिलिटी कम होने पर हेडलाइट्स और फॉग लाइट्स यूज करें, स्पीड घटाएं। ट्रक-बस जैसे हेवी वाहनों से सुरक्षित दूरी रखें क्योंकि उनकी ब्रेकिंग डिस्टेंस ज्यादा होती है। अगर कोई वाहन गलत साइड पर आ रहा है तो स्पीड कम करें और हॉर्न बजाएं। आपात स्थिति में ERSS 112 डायल करें।
ये टिप्स अपनाकर आप हाईवे पर होने वाले ज्यादातर हादसों से बच सकते हैं। सुरक्षित ड्राइविंग न सिर्फ आपकी, बल्कि सड़क पर मौजूद हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।






