सुनील गलगोटिया ने दिल्ली के कनॉट प्लेस में फैमिली बुकस्टोर से शुरुआत की, पिता की मौत और फैमिली डिस्प्यूट के बाद सब छोड़कर 1980 में अपनी पब्लिशिंग शुरू की। सिर्फ 40 स्टूडेंट्स से 2000 में इंस्टीट्यूट शुरू कर 2011 में यूनिवर्सिटी बनाई, आज 40,000+ स्टूडेंट्स, ग्लोबल रैंकिंग्स में टॉप और ग्रुप वैल्यूएशन हजारों करोड़ में। बेटे ध्रुव गलगोटिया CEO के रूप में अगली पीढ़ी संभाल रहे हैं।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का मालिक कौन? फैमिली बुक स्टोर से शुरूआत, आज हजारों करोड़ का एजुकेशन साम्राज्य
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक और चांसलर सुनील गलगोटिया हैं। यह प्राइवेट यूनिवर्सिटी गलगोटियास एजुकेशन ग्रुप का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 1930 के दशक में दिल्ली के कनॉट प्लेस में E.D. Galgotia and Sons नाम की रिटेल बुकस्टोर से हुई थी। यह बुकस्टोर उस समय दिल्ली के इंटेलेक्चुअल्स और स्टूडेंट्स के बीच मशहूर थी, जहां हर किताब मिलने की बात कही जाती थी।
सुनील गलगोटिया का बचपन किताबों से घिरा रहा। फैमिली बिजनेस में पले-बढ़े, लेकिन पिता की अचानक मौत और फैमिली प्रॉपर्टी डिस्प्यूट के कारण उन्हें पुरानी बुकस्टोर और घर से दूर होना पड़ा। इस मुश्किल दौर ने उन्हें नई शुरुआत करने के लिए मजबूर किया। 1980 में उन्होंने Galgotias Publications शुरू की, जो एजुकेशनल बुक्स और पब्लिशिंग पर फोकस करती थी।
2000 में सुनील गलगोटिया ने एजुकेशन सेक्टर में कदम रखा। Galgotias Institute of Management & Technology (GIMT) की शुरुआत सिर्फ 40 स्टूडेंट्स के साथ की गई। इसी साल Galgotias College of Engineering and Technology भी स्थापित हुआ। इन इंस्टीट्यूशंस ने इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट और टेक्नोलॉजी कोर्सेस पर फोकस किया, जो इंडस्ट्री की जरूरतों से जुड़े थे।
2011 में उत्तर प्रदेश सरकार ने इन इंस्टीट्यूशंस को यूनिवर्सिटी स्टेटस दिया और Galgotias University अस्तित्व में आई। ग्रेटर नोएडा में स्थित यह यूनिवर्सिटी आज 40,000 से ज्यादा स्टूडेंट्स को पढ़ाती है। कैंपस में हाई-टेक फैसिलिटीज, इंडस्ट्री पार्टनरशिप्स और ग्लोबल कोर्सेस हैं। यूनिवर्सिटी ने QS World University Rankings 2026 में भारत के टॉप प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में 15वां स्थान हासिल किया है, जबकि सभी यूनिवर्सिटीज में 43वां रैंक। Times Higher Education World University Rankings 2025 में भारत में 45वां और ग्लोबली 1001-1200 बैंड में है।
ग्रुप की ग्रोथ तेज रही है। हाल के वर्षों में AI, रोबोटिक्स और टेक कोर्सेस पर भारी निवेश हुआ है। 2026 में AI पर ₹350 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया गया। यूनिवर्सिटी ने मेडिकल कॉलेज और K-12 स्कूल की प्लानिंग भी शुरू की है, जिसके लिए ₹600 करोड़ का रोडमैप है। पिछले सालों में स्टार्टअप इंक्यूबेशन सेंटर ने 135+ स्टार्टअप्स सपोर्ट किए, जिनमें से कई करोड़ों का रेवेन्यू जेनरेट कर रहे हैं।
सुनील गलगोटिया अब चांसलर हैं। उनके बेटे डॉ. ध्रुव गलगोटिया CEO हैं, जो यूनिवर्सिटी को ग्लोबल लेवल पर ले जा रहे हैं। ऑपरेशंस डायरेक्टर अराधना गलगोटिया भी फैमिली में अहम भूमिका निभा रही हैं। ग्रुप में इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फार्मेसी, लॉ, लिबरल आर्ट्स जैसे कई स्कूल्स हैं। प्लेसमेंट्स मजबूत हैं, जहां स्टूडेंट्स टॉप कंपनियों में जाते हैं।
शुरुआत में 40 स्टूडेंट्स से आज ग्रुप का अनुमानित वैल्यूएशन हजारों करोड़ में है। कुछ रिपोर्ट्स में यह ₹3000 करोड़ से ज्यादा बताया जाता है, जबकि रेवेन्यू ₹181 मिलियन (लगभग ₹1500 करोड़+) के आसपास है। यह सफलता किताबों की छोटी दुकान से एजुकेशन एम्पायर तक की मेहनत, विजन और इंडस्ट्री फोकस की मिसाल है।






