“जेपी मॉर्गन ने सोने की कीमत को 2026 के अंत तक 5,000 डॉलर प्रति औंस पर पहुंचने की भविष्यवाणी की है, जबकि अपसाइड सिनेरियो में यह 8,000 से 8,500 डॉलर तक जा सकता है, जो भारतीय रुपए में 7.79 लाख से अधिक के स्तर को पार कर सकता है। इस भविष्यवाणी के पीछे निजी निवेशकों की बढ़ती हिस्सेदारी, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और आर्थिक अनिश्चितताएं प्रमुख कारक हैं। वर्तमान में भारत में 24 कैरेट सोने की कीमत 1,60,580 रुपए प्रति 10 ग्राम है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास है।”
जेपी मॉर्गन के ग्लोबल रिसर्च टीम ने सोने की कीमतों पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में बुलिश आउटलुक पेश किया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 के चौथे क्वार्टर तक सोने की औसत कीमत 5,055 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जो लंबी अवधि में 5,400 डॉलर तक बढ़ सकती है। अपसाइड सिनेरियो में, यदि निजी निवेशक अपने पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी 3% से बढ़ाकर 4.6% कर देते हैं, तो कीमत 8,000 से 8,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकती है। भारतीय रुपए में, 92 रुपए प्रति डॉलर के वर्तमान विनिमय दर पर, यह 7.36 लाख से 7.82 लाख रुपए प्रति औंस तक पहुंच सकता है, जो 7.79 लाख के स्तर को आसानी से पार कर जाएगा।
यह भविष्यवाणी केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी पर आधारित है। जेपी मॉर्गन के अनुसार, उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक 2026 में 755 टन सोने की खरीद कर सकते हैं, जो 2025 के 1,000 टन से कम लेकिन अभी भी मजबूत स्तर है। चीन और भारत जैसे देशों में बीमा कंपनियां और क्रिप्टो कम्युनिटी भी नई डिमांड पैदा कर रही हैं। उदाहरण के लिए, चाइनीज इंश्योरेंस जायंट्स सोने को हेज के रूप में देख रही हैं, जबकि क्रिप्टो निवेशक सोने को डिजिटल एसेट्स के साथ जोड़ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक मुद्रास्फीति की आशंकाएं, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियां हैं। जेपी मॉर्गन की हेड ऑफ ग्लोबल कमोडिटीज स्ट्रैटेजी, नताशा कनेवा ने कहा कि सोने में यह रैली लीनियर नहीं होगी, लेकिन डाइवर्सिफिकेशन की प्रवृत्ति इसे ऊपर ले जाएगी। गोल्डमैन सैक्स ने भी अपनी भविष्यवाणी को अपडेट करते हुए 2026 के अंत तक 5,400 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य रखा है, जबकि मॉर्गन स्टैनली का बुल-केस टारगेट 5,700 डॉलर है।
भारत में सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड्स से सीधे जुड़ी हुई हैं। वर्तमान में, 24 कैरेट सोने की कीमत 1,60,580 रुपए प्रति 10 ग्राम है, जबकि 22 कैरेट 1,47,200 रुपए प्रति 10 ग्राम। यदि जेपी मॉर्गन का अपसाइड सिनेरियो साकार होता है, तो प्रति 10 ग्राम कीमत 2,51,400 रुपए तक पहुंच सकती है, जो वर्तमान स्तर से 56% की वृद्धि दर्शाएगी। आयात शुल्क और जीएसटी को जोड़कर यह और ऊपर जा सकती है।
सोने की कीमतों का ऐतिहासिक ट्रेंड (प्रति औंस डॉलर में)
| वर्ष | औसत कीमत | उच्चतम कीमत | निम्नतम कीमत |
|---|---|---|---|
| 2023 | 1,943 | 2,135 | 1,810 |
| 2024 | 2,300 | 2,500 | 2,100 |
| 2025 | 3,675 | 4,000 | 3,200 |
| 2026 (अनुमानित) | 5,055 | 8,500 | 4,500 |
यह टेबल जेपी मॉर्गन और अन्य रिपोर्ट्स से ली गई डेटा पर आधारित है, जो दिखाती है कि सोने की कीमतों में 2025 से 2026 के बीच 37% की वृद्धि संभव है।
जेपी मॉर्गन की रिपोर्ट में उल्लेख है कि टैरिफ अनिश्चितताएं और मजबूत ईटीएफ डिमांड सोने को सपोर्ट कर रही हैं। 2025 में ईटीएफ ने रिकॉर्ड हाई पर पहुंचकर 250 टन की खरीद की, जो 2026 में जारी रह सकती है। भारत में, सोने की मांग त्योहारों और निवेश के रूप में बढ़ रही है। आरबीआई ने भी अपने रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाई है, जो वर्तमान में 800 टन से अधिक है।
अन्य बैंकों की भविष्यवाणियां
गोल्डमैन सैक्स : 2026 के अंत तक 5,400 डॉलर प्रति औंस, प्राइवेट सेक्टर डाइवर्सिफिकेशन पर फोकस।
मॉर्गन स्टैनली : बुल-केस में 5,700 डॉलर, यदि बॉन्ड से शिफ्ट होता है।
जेपी मॉर्गन : बेस केस 5,000 डॉलर, अपसाइड 8,500 डॉलर यदि आवंटन 4.6% तक बढ़ता है।
ये भविष्यवाणियां आर्थिक अनिश्चितताओं पर आधारित हैं, जैसे अमेरिकी चुनावों के बाद की नीतियां और वैश्विक मुद्रास्फीति। सोने को सेफ-हेवन एसेट के रूप में देखा जा रहा है, जहां बॉन्ड और स्टॉक मार्केट की अस्थिरता से निवेशक दूर हो रहे हैं।
भारतीय बाजार में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले स्थानीय कारक आयात पर निर्भरता और रुपए की कमजोरी हैं। यदि डॉलर मजबूत होता है, तो INR में कीमत और बढ़ सकती है। जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि 2026 में ग्लोबल गोल्ड डिमांड 4,500 टन तक पहुंच सकती है, जिसमें एशियाई बाजारों का बड़ा योगदान होगा।
सोने में निवेश के प्रमुख जोखिम और अवसर
जोखिम : कीमतों में शॉर्ट-टर्म उतार-चढ़ाव, यदि फेड ब्याज दरें बढ़ाता है।
अवसर : लंबी अवधि में हेज के रूप में, विशेषकर मुद्रास्फीति के खिलाफ।
टिप्स : ईटीएफ या गोल्ड बॉन्ड्स के माध्यम से निवेश करें, जो टैक्स बेनिफिट्स देते हैं।
जेपी मॉर्गन की यह भविष्यवाणी निवेशकों के लिए एक सिग्नल है कि सोना अभी भी अंडरवैल्यूड है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 60 ट्रिलियन डॉलर का ग्लोबल गोल्ड क्लास संभव है, यदि डाइवर्सिफिकेशन जारी रहता है। भारत में, सोने की खपत 2026 में 900 टन तक पहुंच सकती है, जो आर्थिक विकास से जुड़ी है।
भारत में प्रमुख शहरों में वर्तमान सोने की कीमतें (24 कैरेट, प्रति 10 ग्राम)
| शहर | कीमत (रुपए) | बदलाव (रुपए) |
|---|---|---|
| मुंबई | 1,60,580 | -8,620 |
| दिल्ली | 1,60,700 | -8,550 |
| चेन्नई | 1,61,200 | -8,700 |
| कोलकाता | 1,60,650 | -8,600 |
| बैंगलोर | 1,60,900 | -8,650 |
ये कीमतें बाजार के उतार-चढ़ाव को दर्शाती हैं, जहां हालिया गिरावट के बाद रिकवरी की उम्मीद है।
जेपी मॉर्गन के स्ट्रैटेजिस्ट निकोलास पैनिगिर्त्जोग्लू ने रिपोर्ट में कहा कि यदि निजी निवेशक बॉन्ड से शिफ्ट करते हैं, तो सोने की रैली और तेज हो सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं जैसे यूएस इकोनॉमी की स्लोडाउन और जियोपॉलिटिकल टेंशन्स सोने को बूस्ट दे रही हैं। 2026 में, यदि ये ट्रेंड्स जारी रहते हैं, तो कीमत 8,500 डॉलर को छू सकती है, जो INR में 7.82 लाख रुपए प्रति औंस के बराबर है।
सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले वैश्विक कारक
केंद्रीय बैंक खरीदारी : ईएम केंद्रीय बैंक 755 टन खरीद सकते हैं।
ईटीएफ इनफ्लो : 2026 में 250 टन से अधिक।
क्रिप्टो इंटीग्रेशन : नई डिमांड से कीमतों में 10-15% वृद्धि।
मुद्रास्फीति : यदि 3% से ऊपर रहती है, तो सोना मजबूत रहेगा।
रुपए की कमजोरी : डॉलर स्ट्रेंग्थ से INR कीमतें बढ़ेंगी।
यह विश्लेषण दर्शाता है कि सोना 2026 में निवेशकों के लिए प्रमुख एसेट क्लास बनेगा।
Disclaimer: यह लेख समाचार, रिपोर्ट और टिप्स पर आधारित है। स्रोतों का उल्लेख नहीं किया गया है। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।






