“मोदी सरकार NDP को GDP की जगह मुख्य आर्थिक पैमाने के रूप में अपनाने पर विचार कर रही है, जो UN के SNA 2025 दिशानिर्देशों से जुड़ा है; NDP GDP से डेप्रिशिएशन घटाकर निकाला जाता है, जो वास्तविक निवल वृद्धि दिखाता है; FY 2025 में डेप्रिशिएशन 37 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ 7.4% अनुमानित है; नई GDP सीरीज फरवरी 2026 में जारी होगी, बेस ईयर 2022-23 होगा।”
मोदी सरकार आर्थिक विकास के मुख्य पैमाने को बदलने की दिशा में कदम बढ़ा रही है, जहां NDP (Net Domestic Product) को GDP (Gross Domestic Product) की जगह प्रमुख मीट्रिक बनाने पर विचार हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बदलाव UN के System of National Accounts (SNA) 2025 गाइडलाइंस के अनुरूप होगा, जो अर्थव्यवस्था की सस्टेनेबल ग्रोथ पर फोकस करता है।
NDP की गणना GDP से कैपिटल गुड्स पर डेप्रिशिएशन घटाकर की जाती है, जो अर्थव्यवस्था में वास्तविक निवल मूल्यवृद्धि को दर्शाता है। FY 2025 में भारत का डेप्रिशिएशन चार्ज लगभग 37 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसने GDP को प्रभावित किया। इससे NDP GDP से कम रहता है, लेकिन यह पुरानी मशीनरी और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षय को ध्यान में रखकर बेहतर तस्वीर पेश करता है।
सरकार का यह कदम इसलिए जरूरी हो रहा है क्योंकि GDP में डेप्रिशिएशन को शामिल नहीं किया जाता, जो विकास की असली रफ्तार को ओवरस्टेट कर सकता है। SNA 2025 के तहत, कई देश NDP को अपनाने की ओर बढ़ रहे हैं ताकि पर्यावरणीय और सस्टेनेबल फैक्टर्स को मीट्रिक में शामिल किया जा सके। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश बढ़ने से डेप्रिशिएशन रेट ऊंचा है, जिससे NDP बेहतर इंडिकेटर साबित हो सकता है।
नई GDP सीरीज फरवरी 2026 में जारी होगी, जिसमें बेस ईयर को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा। इससे आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी और NDP को मुख्य फोकस बनाना आसान होगा। 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ 7.4% अनुमानित है, लेकिन NDP अपनाने से यह आंकड़ा समायोजित हो सकता है।
GDP vs NDP: मुख्य अंतर
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
| पैरामीटर | GDP | NDP |
|---|---|---|
| परिभाषा | देश में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य | GDP से डेप्रिशिएशन घटाकर निकाला गया निवल मूल्य |
| फोकस | सकल उत्पादन | निवल वृद्धि, क्षय को ध्यान में रखते हुए |
| FY 2025 उदाहरण | लगभग 300 लाख करोड़ रुपये (अनुमानित) | GDP से 37 लाख करोड़ घटाकर लगभग 263 लाख करोड़ रुपये |
| उपयोगिता | त्वरित ग्रोथ मापन | सस्टेनेबल विकास मापन |
सस्टेनेबिलिटी: NDP पर्यावरणीय क्षय और कैपिटल वेयर को शामिल करता है, जो क्लाइमेट चेंज के दौर में भारत जैसे देश के लिए महत्वपूर्ण है।
पॉलिसी मेकिंग: सरकार को बेहतर निवेश निर्णय लेने में मदद मिलेगी, जैसे रिन्यूएबल एनर्जी में फंडिंग बढ़ाना।
ग्लोबल अलाइनमेंट: UN SNA 2025 के साथ जुड़कर भारत अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।
आर्थिक चुनौतियां: उच्च इंफ्लेशन और सप्लाई चेन इश्यूज में NDP वास्तविक तस्वीर देगा, जहां GDP ओवरऑप्टिमिस्टिक लग सकता है।
यह शिफ्ट अर्थशास्त्रियों के बीच बहस का विषय बना हुआ है, क्योंकि NDP अपनाने से शॉर्ट-टर्म ग्रोथ आंकड़े कम दिख सकते हैं, लेकिन लॉन्ग-टर्म पॉलिसी को मजबूत करेगा।
Disclaimer: This news is based on reports, tips and available sources.






