सिर्फ 7 लाख में बिकी चांदनी चौक की ये छोटी सी इलेक्ट्रिकल दुकान, फिर कैसे बनी 80 हजार करोड़ की कंपनी?

By Ravi Singh

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चांदनी चौक की पुरानी इलेक्ट्रिकल दुकान से हवेल्स इंडिया की आधुनिक मुख्यालय तक का प्रतीकात्मक चित्र
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“चांदनी चौक की एक छोटी इलेक्ट्रिकल दुकान को 1971 में किमत राय गुप्ता ने करीब 10 लाख रुपये में खरीदा, जो बाद में हवेल्स इंडिया बनकर 80 हजार करोड़ की मार्केट कैप वाली कंपनी में तब्दील हुई। प्रमुख माइलस्टोन में मैन्युफैक्चरिंग में एंट्री, ग्लोबल एक्विजिशन और डाइवर्सिफिकेशन शामिल हैं, जबकि वर्तमान में कंपनी की रेवेन्यू 22 हजार करोड़ से अधिक है।”

दिल्ली के चांदनी चौक में भागीरथ पैलेस इलाके में 1958 में शुरू हुई एक छोटी सी इलेक्ट्रिकल ट्रेडिंग दुकान, जिसका नाम हवेली राम गुप्ता ने ‘हवेल्स’ रखा था, 1971 में किमत राय गुप्ता (क्यूआरजी) ने लगभग 10 लाख रुपये (उस समय की मुद्रा में करीब 7-10 लाख के बीच) में खरीद ली। क्यूआरजी, जो पंजाब के मालेरकोटला में 1937 में जन्मे और पहले एक स्कूल टीचर थे, ने इलेक्ट्रिकल गुड्स ट्रेडिंग में 10 साल का अनुभव हासिल कर लिया था। उन्होंने इस दुकान को सिर्फ ट्रेडिंग से आगे बढ़ाकर मैन्युफैक्चरिंग की दुनिया में कदम रखा, जो कंपनी की ग्रोथ की पहली सीढ़ी बनी।

क्यूआरजी ने 1983 में कंपनी को हवेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में इनकॉर्पोरेट किया और सहारनपुर में पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शुरू की, जहां स्विचगियर जैसे प्रोडक्ट्स बनने लगे। 1990 के दशक में कंपनी ने केबल्स और वायर्स सेगमेंट में एंट्री की, जब 1996 में अलवर, राजस्थान में एक सिक यूनिट को एक्वायर किया गया। इस कदम से कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ी और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत हुआ, जिससे रेवेन्यू में 20-25% की सालाना ग्रोथ देखी गई।

2000 के दशक में हवेल्स ने इंटरनेशनल एक्सपैंशन पर फोकस किया। 2007 में कंपनी ने यूरोपियन लाइटिंग कंपनी सिल्वेनिया को 200 मिलियन यूरो में एक्वायर किया, जो उस समय भारत की सबसे बड़ी ओवरसीज डील थी। इस एक्विजिशन से हवेल्स को ग्लोबल मार्केट में एंट्री मिली और लाइटिंग सेगमेंट में 30% से अधिक ग्रोथ हुई। हालांकि, 2011 में सिल्वेनिया को बेच दिया गया, लेकिन इससे मिले अनुभव ने कंपनी को LED लाइटिंग और एनर्जी एफिशिएंट प्रोडक्ट्स पर फोकस करने में मदद की।

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2016 में हवेल्स ने लॉयड कंज्यूमर ब्रैंड को 1,600 करोड़ रुपये में एक्वायर किया, जिससे कंपनी एयर कंडीशनर, टीवी और वाशिंग मशीन जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में एंटर हुई। इस स्ट्रैटेजी से कंपनी की मार्केट शेयर 15% तक बढ़ी और डाइवर्सिफिकेशन ने रिस्क को कम किया। वर्तमान में, हवेल्स के प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में फैन, वॉटर हीटर, स्विचेस, एयर कूलर और इंडस्ट्रियल केबल्स शामिल हैं, जो 60 से अधिक देशों में एक्सपोर्ट होते हैं।

कंपनी की फाइनेंशियल ग्रोथ को देखें तो 2000 में रेवेन्यू महज 100 करोड़ के आसपास था, जो 2010 तक 5,000 करोड़ पहुंच गया। 2020 के दशक में, कोविड-19 के बावजूद, कंपनी ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर निवेश किया, जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और स्मार्ट होम सॉल्यूशंस, जिससे रेवेन्यू 15% CAGR से बढ़ा। लेटेस्ट फाइनेंशियल्स के अनुसार, कंपनी की एनुअल रेवेन्यू 22,366 करोड़ रुपये है, जबकि प्रॉफिट 1,483 करोड़ रुपये। मार्केट कैपिटलाइजेशन 80,728 करोड़ रुपये पर पहुंच चुकी है, जो स्टॉक मार्केट में 9.31 टाइम्स बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रही है।

कंपनी की ग्रोथ टाइमलाइन

वर्षप्रमुख माइलस्टोनप्रभाव
1971हवेल्स ब्रैंड का एक्विजिशनट्रेडिंग से मैन्युफैक्चरिंग की नींव
1983कंपनी इनकॉर्पोरेशनऑर्गनाइज्ड स्ट्रक्चर और एक्सपैंशन
1996केबल्स एंड वायर्स यूनिट एक्वायरप्रोडक्शन कैपेसिटी में 50% बढ़ोतरी
2007सिल्वेनिया एक्विजिशनग्लोबल प्रेजेंस और लाइटिंग सेगमेंट ग्रोथ
2016लॉयड एक्विजिशनकंज्यूमर ड्यूरेबल्स में एंट्री, रेवेन्यू डबल
2020डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशनई-कॉमर्स से 20% सेल्स ग्रोथ

क्यूआरजी की लीडरशिप स्टाइल में फैमिली वैल्यूज और इनोवेशन का मिश्रण था। उन्होंने डीलर नेटवर्क को मजबूत किया, जहां 10,000 से अधिक डीलर्स आज कंपनी के साथ जुड़े हैं। सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करते हुए, हवेल्स ने ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेस अपनाईं, जैसे सोलर एनर्जी यूज और वेस्ट रिडक्शन, जिससे कॉस्ट 10-15% कम हुई। कंपनी ने R&D पर सालाना 2-3% रेवेन्यू निवेश किया, जिससे स्मार्ट स्विचेस और IoT बेस्ड प्रोडक्ट्स लॉन्च हुए।

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मार्केट चैलेंजेस में कॉम्पिटिशन से निपटने के लिए हवेल्स ने ब्रैंडिंग पर जोर दिया। ‘शॉक लागा क्या?’ जैसे ऐड कैंपेन से कंज्यूमर अवेयरनेस बढ़ी, जबकि एक्सपोर्ट मार्केट में यूएस और यूरोप में 25% शेयर हासिल किया। फाइनेंशियल मैनेजमेंट में लो डेब्ट रेशियो (0.1 से कम) रखा गया, जो इन्वेस्टर कॉन्फिडेंस बढ़ाता है। कंपनी की स्टॉक परफॉर्मेंस देखें तो IPO के बाद से 100 गुना रिटर्न मिला है।

प्रमुख स्ट्रैटेजीज जो ग्रोथ ड्राइव कीं

डाइवर्सिफिकेशन : एक प्रोडक्ट से 7 सेगमेंट्स तक विस्तार, रिस्क डिस्ट्रीब्यूशन।

एक्विजिशन : स्ट्रैटेजिक बायआउट्स से टेक्नोलॉजी और मार्केट एक्सेस।

इनोवेशन : LED और स्मार्ट होम प्रोडक्ट्स से 30% मार्केट शेयर।

डिस्ट्रीब्यूशन : 1 लाख से अधिक रिटेल आउटलेट्स, जो सेल्स को बूस्ट देते हैं।

सस्टेनेबिलिटी : एनर्जी एफिशिएंट प्रोडक्ट्स से गवर्नमेंट कॉन्ट्रैक्ट्स।

क्यूआरजी के निधन के बाद, उनके बेटे अनिल राय गुप्ता ने CMD की कमान संभाली, जो कंपनी को नेक्स्ट लेवल पर ले गए। आज हवेल्स 8 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स ऑपरेट करती है, जहां 15,000 से अधिक एम्प्लॉयी काम करते हैं। फ्यूचर प्लान्स में EV चार्जिंग सॉल्यूशंस और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्ट्स शामिल हैं, जो भारत के 5G और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं। कंपनी की एनुअल ग्रोथ रेट 15% बनी हुई है, जो इंडस्ट्री एवरेज से ऊपर है।

फाइनेंशियल ग्रोथ ओवरव्यू

पैरामीटर20102020वर्तमान
रेवेन्यू (क्रोड़)5,0009,40022,366
प्रॉफिट (क्रोड़)2007351,483
मार्केट कैप (क्रोड़)2,00030,00080,728
एक्सपोर्ट (%)102025

यह ग्रोथ स्टोरी दिखाती है कि विजन, रिस्क टेकिंग और मार्केट अडैप्टेशन से छोटी शुरुआत कैसे बड़ा एम्पायर बन सकती है। हवेल्स अब इंडियन इलेक्ट्रिकल इंडस्ट्री की लीडर है, जहां कॉम्पिटिटर्स जैसे फिलिप्स और सीमेंस से आगे निकल चुकी है।

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Disclaimer: यह समाचार/रिपोर्ट/टिप्स स्रोतों पर आधारित है।

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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