“निफ्टी 26,340 के रिकॉर्ड हाई से फिसलकर 25,683 पर बंद, सपोर्ट 25,540 के 100-डे एमए पर। अमेरिकी 500% टैरिफ धमकी से 2.45% साप्ताहिक गिरावट, लेकिन 7.2% विकास दर प्रभाव को सीमित रखेगी। बाजार में आईटी और ऑयल सेक्टर सबसे प्रभावित, जबकि मिडकैप्स में रिकवरी संकेत।”
निफ्टी 50 ने जनवरी की शुरुआत में 26,340 का रिकॉर्ड हाई छुआ, लेकिन उसके बाद लगातार पांच सत्रों में गिरावट दर्ज की गई। यह फिसलन मुख्य रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित उस बिल से जुड़ी है, जो रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाने का प्रावधान करता है। भारत, जो रूसी क्रूड का बड़ा आयातक है, इस धमकी से प्रभावित हुआ, जिससे बाजार में विदेशी निवेशकों ने 900 मिलियन डॉलर की बिकवाली की।
बाजार का हालिया प्रदर्शन निफ्टी ने सप्ताह में 645 अंकों की गिरावट झेली, जो सितंबर के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। सेंसेक्स भी 2,186 अंक टूटकर 83,576 पर बंद हुआ। आईटी, ऑयल और गैस सेक्टर में 2.8% तक की गिरावट देखी गई, जबकि फार्मा और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में मामूली रिकवरी हुई। ब्रॉडर मार्केट में मिडकैप 100 ने 0.5% की बढ़त दिखाई, लेकिन स्मॉलकैप्स में दबाव बना रहा।
| इंडेक्स | रिकॉर्ड हाई | वर्तमान स्तर | साप्ताहिक गिरावट (%) |
|---|---|---|---|
| निफ्टी 50 | 26,340 | 25,683 | 2.45 |
| सेंसेक्स | 85,762 | 83,576 | 2.55 |
| बैंक निफ्टी | 59,500 | 58,200 | 2.10 |
| निफ्टी आईटी | 42,500 | 41,200 | 3.20 |
सपोर्ट लेवल का विश्लेषण रिकॉर्ड हाई से फिसलने के बाद निफ्टी ने 26,000 और 25,800 पर प्रारंभिक सपोर्ट पाया, लेकिन यह टूट गया। अब मुख्य सपोर्ट 25,540 के 100-डे मूविंग एवरेज पर बना है, जहां से पुलबैक की संभावना है। यदि यह स्तर टूटा, तो 25,000 तक गिरावट आ सकती है। तकनीकी इंडिकेटर्स जैसे आरएसआई 40 के नीचे हैं, जो ओवरसोल्ड जोन दर्शाता है, लेकिन वॉल्यूम में कमी से रिकवरी चुनौतीपूर्ण लग रही है। 26,050-26,100 का बैंड तत्काल सपोर्ट जोन है, जबकि 26,500 ऊपरी रेसिस्टेंस।
मुख्य सपोर्ट पॉइंट्स : 25,540 (100-डे एमए), 25,900 (50-डे एमए), 25,000 (200-डे एमए)।
रेसिस्टेंस लेवल : 26,000, 26,373 (हालिया हाई)।
वॉलेटिलिटी इंडिकेटर : इंडिया VIX 9.45 पर, जो ऐतिहासिक निचले स्तर पर है लेकिन बढ़त की ओर।
500% टैरिफ का प्रभाव अमेरिकी बिल रूस से तेल खरीदने वाले देशों जैसे भारत, चीन और ब्राजील पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव करता है, जो भारत के 85 बिलियन डॉलर के निर्यात को प्रभावित कर सकता है। ऑयल और गैस सेक्टर में 2.8% गिरावट आई, क्योंकि भारत का क्रूड आयात विविध है लेकिन रूसी हिस्सा बढ़ा है। हालांकि, यूनाइटेड नेशंस का अनुमान है कि 2025-26 में भारत की 7.2% विकास दर इस प्रभाव को काफी हद तक ऑफसेट कर देगी, क्योंकि घरेलू खपत और सार्वजनिक निवेश मजबूत हैं। टैक्स रिफॉर्म्स और मॉनेटरी ईजिंग से अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।
बाजार की मजबूती की संभावनाएं टैरिफ धमकी के बावजूद, बाजार में चुनिंदा खरीदारी दिख रही है। आईटी और कंज्यूमर सेक्टर में क्वालिटी स्टॉक्स जैसे Infosys और Hindustan Unilever में रुचि बढ़ी है। यदि अमेरिका-भारत ट्रेड डील जल्द होती है, तो प्रभाव सीमित रहेगा। ब्रोकरेज हाउसेज का मानना है कि 26,000 से ऊपर होल्ड करने पर निफ्टी 26,500 तक जा सकता है, अन्यथा माइल्ड प्रॉफिट-बुकिंग। मिडकैप्स में ज्वेलरी और एफएमसीजी सेक्टर मजबूत दिख रहे हैं, जहां विदेशी फंड्स की बिकवाली कम है।
| प्रभावित सेक्टर | गिरावट (%) | रिकवरी फैक्टर |
|---|---|---|
| ऑयल एंड गैस | 2.80 | क्रूड डायवर्सिफिकेशन |
| आईटी | 3.20 | Q3 अर्निंग्स ग्रोथ |
| फाइनेंशियल | 1.50 | मॉनेटरी ईजिंग |
| फार्मा | 0.75 | घरेलू डिमांड |
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