बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को क्या मिला, क्यों गिरे प्रॉपर्टी कंपनी के शेयर? एक्सपर्ट ने सबकुछ बताया.

By Ravi Singh

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ट्रेंड्स दिखाते हैं कि रियल एस्टेट का GDP कंट्रीब्यूशन 8% से बढ़कर 2047 तक 15-16% हो सकता है, लेकिन अफोर्डेबल सेगमेंट की गिरावट से बैलेंस्ड ग्रोथ चैलेंजिंग रहेगा। एक्सपर्ट्स सुझाव देते हैं कि पॉलिसी कंटिन्यूटी से इंडस्ट्री स्टेटस और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार जरूरी है।
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“केंद्रीय बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर कैपेक्स में बढ़ोतरी और REITs के जरिए CPSE एसेट्स की मोनेटाइजेशन जैसी अप्रत्यक्ष मदद मिली, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग पर कोई बड़ा ऐलान न होने से निराशा हुई। प्रॉपर्टी कंपनियों के शेयर 10% तक गिरे क्योंकि बजट में टैक्स रिलीफ और अफोर्डेबल डेफिनिशन में बदलाव की उम्मीद टूट गई, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंफ्रा पुश से लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा लेकिन शॉर्ट-टर्म डिमांड पर असर पड़ेगा।”

बजट 2026 में रियल एस्टेट सेक्टर को मिली अप्रत्यक्ष मदद

केंद्रीय बजट 2026-27 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रियल एस्टेट सेक्टर के लिए कोई डायरेक्ट इंसेंटिव नहीं दिए, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस से सेक्टर को अप्रत्यक्ष फायदा होने की उम्मीद है। कैपिटल एक्सपेंडिचर को FY27 के लिए 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो FY26 के 11.2 लाख करोड़ से ज्यादा है। यह बढ़ोतरी टियर-2 और टियर-3 शहरों में अर्बन इंफ्रा को बूस्ट देगी, जिससे हाउसिंग डिमांड और कमर्शियल प्रॉपर्टी में ग्रोथ आएगी।

सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) के रियल एस्टेट एसेट्स और लैंड होल्डिंग्स को REITs के जरिए मोनेटाइज करने का प्रस्ताव है। इससे प्राइम सिटी लोकेशंस में बड़े एसेट्स अनलॉक होंगे, जो इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को आकर्षित करेंगे। इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड का ऐलान भी किया गया, जो कंस्ट्रक्शन फेज में रिस्क को कवर करेगा और प्राइवेट इनवेस्टमेंट को बढ़ावा देगा।

सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्लान सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है, क्योंकि इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लॉजिस्टिक्स, कमर्शियल डेवलपमेंट में तेजी आएगी। PMAY-Urban के लिए अलोकेशन बढ़ाया गया है, लेकिन इंडस्ट्री की मांग थी कि अफोर्डेबल हाउसिंग की डेफिनिशन को ब्रॉड किया जाए और होमबायर्स के लिए टैक्स रिलीफ दिया जाए।

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अफोर्डेबल हाउसिंग पर क्यों हुई निराशा

अफोर्डेबल हाउसिंग सेगमेंट में बजट से कोई कंक्रीट सपोर्ट नहीं मिला, जो सेक्टर के लिए बड़ा झटका है। ANAROCK डेटा के मुताबिक, अफोर्डेबल हाउसिंग की सेल्स शेयर 2019 में 38% से घटकर 2022 में 26% और 2025 में सिर्फ 18% रह गई। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि महामारी के बाद यह सेगमेंट फ्री फॉल में है और इसे बूस्ट करने के लिए हाई-इंपैक्ट मेजर्स की जरूरत थी।

CREDAI ने बजट को अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए ‘डीपली डिसअपॉइंटिंग’ बताया। नेशनल प्रेसिडेंट शेखर पटेल ने कहा कि अफोर्डेबल हाउसिंग की पुरानी डेफिनिशन (45 लाख रुपये तक) अब आउटडेटेड है और इसे मेट्रो सिटीज के लिए 75-85 लाख तक बढ़ाना चाहिए था। इससे सप्लाई शेयर और घटकर 12% तक पहुंच सकती है, जो रेंटल बढ़ोतरी और इनफॉर्मल हाउसिंग को बढ़ावा देगा।

अफोर्डेबल हाउसिंग को इकोनॉमिक इंफ्रास्ट्रक्चर मानते हुए, इंडस्ट्री ने डेवलपर्स के लिए इंसेंटिव और बायर्स के लिए इंटरेस्ट सब्सिडी की मांग की थी। लेकिन बजट में PMAY का अलोकेशन बढ़ाने के अलावा कोई नई स्कीम नहीं आई, जो सेगमेंट की गिरावट को रोकने में नाकाफी है।

प्रॉपर्टी कंपनियों के शेयर क्यों गिरे

बजट स्पीच के बाद रियल्टी स्टॉक्स में भारी गिरावट आई, क्योंकि सेक्टर की उम्मीदें टूट गईं। Nifty Realty इंडेक्स 4.6% गिरा, जबकि कुछ स्टॉक्स 10% तक नीचे आए। Lodha Developers और Sobha जैसे स्टॉक्स 5% से ज्यादा गिरे, Godrej Properties, DLF, Oberoi Realty और Signatureglobal में भी 5% तक की गिरावट दर्ज हुई।

मुख्य वजह अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग पर कोई पॉलिसी सपोर्ट न होना था। ब्रोकरेज व्यूज के मुताबिक, बजट स्टॉक-स्पेसिफिक इंपैक्ट वाला रहा, जहां लक्जरी प्लेयर्स से ज्यादा अफोर्डेबल सेगमेंट वाली कंपनियां प्रभावित हुईं। इसके अलावा, ब्रॉडर मार्केट में STT हाइक (फ्यूचर्स पर 0.05% और ऑप्शंस पर 0.15%) ने सेंटिमेंट खराब किया, जिससे ट्रेडिंग वॉल्यूम घटने की चिंता बढ़ी।

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REITs ने 3% तक रैली की, क्योंकि CPSE एसेट्स के लिए डेडिकेटेड REITs का ऐलान पॉजिटिव रहा। लेकिन ओवरऑल, रियल्टी सेक्टर में प्रॉफिट बुकिंग हुई, क्योंकि बजट में होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को 5 लाख तक बढ़ाने या GST रेट्स में कट जैसी डिमांड्स अनसुनी रह गईं।

एक्सपर्ट्स की राय: लॉन्ग-टर्म ग्रोथ लेकिन शॉर्ट-टर्म चैलेंज

कंपनीकानामगिरावटकाप्रतिशतमुख्यवजह
LodhaDevelopers5%अफोर्डेबलहाउसिंगपरकोईबूस्टनमिलना
Sobha5%बजटमिससेमिड-इनकमसेगमेंटप्रभावित
GodrejProperties4-5%पॉलिसीसपोर्टकीकमी
DLF3-4%इंफ्रापुशसेअप्रत्यक्षफायदालेकिनडायरेक्टरिलीफनदारद
OberoiRealty4%मार्केटसेंटिमेंटखराब

ANAROCK चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि बजट डायरेक्ट रिलीफ की बजाय ग्रोथ कैटेलिस्ट की तरह काम करेगा। इंफ्रा, मैन्युफैक्चरिंग और MSMEs पर फोकस से रियल एस्टेट को इंडायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा, लेकिन अफोर्डेबल हाउसिंग की अनदेखी से सेगमेंट की गिरावट जारी रहेगी।

Tata Realty के MD और CEO संजय दत्त ने बजट को मैक्रो स्टेबिलिटी और इंफ्रा-लेड ग्रोथ पर फोकस्ड बताया। टियर-2/3 सिटीज में निवेश से नए इकोनॉमिक क्लस्टर्स बनेंगे, जो रेसिडेंशियल और कमर्शियल डेवलपमेंट को बूस्ट देंगे।

CBRE के चेयरमैन अंशुमन मैगजीन ने CPSE एसेट्स को REITs में शामिल करने को सिग्निफिकेंट शिफ्ट कहा, जो मार्केट को डीपन करेगा और इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स को बढ़ाएगा। KPMG के पार्टनर चिंतन पटेल ने गवर्नमेंट लैंड होल्डिंग्स को REITs से मोनेटाइज करने को इंटरेस्टिंग बताया, जो कमर्शियल रियल एस्टेट को मजबूत करेगा।

Mindspace Business Parks REIT के MD और CEO रमेश नायर ने डेडिकेटेड REITs को लॉन्ग-टर्म इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के लिए स्ट्रॉन्ग पाइपलाइन बताया। Alvarez & Marsal के एक्सपर्ट्स ने बायबैक टैक्सेशन में बदलाव को छोटे शेयरहोल्डर्स के लिए फायदेमंद कहा, जो रियल एस्टेट फर्म्स के लिए कैपिटल गेंस को आसान बनाएगा।

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Sri Lotus Developers की डायरेक्टर आशका पंडित ने कैपेक्स अलोकेशन और इंफ्रा रिस्क फंड को फाइनेंसिंग कंस्ट्रेंट्स को कम करने वाला बताया, जो टियर-2 सिटीज को निवेश डेस्टिनेशन बनाएगा। Lohia ग्रुप के एक्सपर्ट ने सिटी इकोनॉमिक रीजन मूव को छोटे शहरों के ऑर्गनाइज्ड ग्रोथ के लिए पॉजिटिव कहा।

की पॉइंट्स: बजट से रियल एस्टेट पर इंपैक्ट

इंफ्रा पुश : 12.2 लाख करोड़ कैपेक्स से अर्बन एक्सपैंशन, जो हाउसिंग डिमांड बढ़ाएगा।

REITs एक्सपैंशन : CPSE एसेट्स की मोनेटाइजेशन से प्राइम लोकेशंस अनलॉक, इंस्टीट्यूशनल फंडिंग बढ़ेगी।

रेल कॉरिडोर : 7 हाई-स्पीड प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी बेहतर, लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल ग्रोथ।

अफोर्डेबल चैलेंज : कोई नई डेफिनिशन या टैक्स रिलीफ नहीं, सेल्स शेयर गिरावट जारी।

मार्केट रिएक्शन : रियल्टी स्टॉक्स डाउन, लेकिन REITs अप, इंडस्ट्री स्टेटस की मांग अनसुनी।

फ्यूचर आउटलुक : लॉन्ग-टर्म में Viksit Bharat विजन से सेक्टर का GDP कंट्रीब्यूशन 15-16% तक पहुंच सकता है।

सेक्टरल अलोकेशन और ट्रेंड्स

सेक्टर/स्कीमअलोकेशन(लाखकरोड़रुपये)इंपैक्टऑनरियलएस्टेट
कैपिटलएक्सपेंडिचर12.2(FY27)टियर-2/3सिटीजमेंग्रोथ,हाउसिंगडिमांडउप
PMAY-Urbanबढ़ोतरी(स्पेसिफिकअमाउंटनहीं)अफोर्डेबलसप्लाईबूस्टलेकिनअपर्याप्त
इंफ्रारिस्कगारंटीफंडनयाफंडकंस्ट्रक्शनरिस्ककवर,प्राइवेटइनवेस्टमेंटउप

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Ravi Singh

मेरा नाम रवि सिंह है, मैं एक कंटेंट राइटर के तौर पर काम करता हूँ और मुझे लेख लिखना बहुत पसंद है। 4 साल के ब्लॉगिंग अनुभव के साथ मैं हमेशा दूसरों को प्रेरित करने और उन्हें सफल ब्लॉगर बनाने के लिए ज्ञान साझा करने के लिए तैयार रहता हूँ।

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