केंद्रीय बजट 2026-27 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को मजबूत समर्थन मिला है। PLI स्कीम के लिए आवंटन बढ़ाकर ₹5,940 करोड़ कर दिया गया, लिथियम-आयन बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग पर कैपिटल गुड्स की कस्टम ड्यूटी छूट मार्च 2028 तक बढ़ाई गई। रेयर अर्थ कॉरिडोर और क्रिटिकल मिनरल प्रोसेसिंग पर छूट से EV सप्लाई चेन मजबूत होगी। कैपिटल एक्सपेंडिचर ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ने से इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट मिलेगा, जिससे ट्रक और CV की डिमांड बढ़ेगी। इंडस्ट्री लीडर्स ने इसे लॉन्ग-टर्म ग्रोथ और EV लोकलाइजेशन के लिए सकारात्मक बताया है, हालांकि इनवर्टेड GST और अतिरिक्त सब्सिडी की कमी पर चिंता जताई है।
बजट 2026 में ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए प्रमुख घोषणाएं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026-27 में ऑटोमोबाइल सेक्टर को मैन्युफैक्चरिंग, EV एडॉप्शन और सप्लाई चेन रेजिलिएंस पर फोकस करते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सेक्टर की प्रमुख मांगों पर ध्यान देते हुए ड्यूटी स्ट्रक्चर में राहत और इंफ्रास्ट्रक्चर पुश दिया गया है।
PLI स्कीम में बढ़ोतरी : ऑटोमोबाइल्स एंड ऑटो कंपोनेंट्स के लिए PLI स्कीम के तहत 2026-27 के लिए ₹5,939.87 करोड़ का प्रावधान किया गया है। यह पिछले साल के रिवाइज्ड एस्टिमेट ₹2,091 करोड़ से लगभग तीन गुना ज्यादा है। स्कीम के तहत अब तक ₹35,657 करोड़ का निवेश आ चुका है और 48,974 जॉब्स क्रिएट हुए हैं। एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी व्हीकल्स और कंपोनेंट्स पर फोकस जारी रहेगा।
EV बैटरी और क्रिटिकल मिनरल्स पर ड्यूटी छूट : लिथियम-आयन बैटरी सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए कैपिटल गुड्स पर बेसिक कस्टम ड्यूटी छूट को मार्च 2028 तक बढ़ाया गया है। EV बैटरी और मोटर्स के लिए मशीनरी पर भी छूट दी गई है। क्रिटिकल EV मिनरल्स (लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स) प्रोसेसिंग के कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट से घरेलू उत्पादन बढ़ेगा और इंपोर्ट निर्भरता कम होगी।
रेयर अर्थ कॉरिडोर : ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित किए जाएंगे। इससे EV मोटर्स में इस्तेमाल होने वाले NdFeB मैग्नेट्स की लोकलाइजेशन बढ़ेगी। नवंबर 2025 में अप्रूव्ड सintered रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स स्कीम के साथ यह कदम सप्लाई चेन को मजबूत करेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर पुश : इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 लॉन्च किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम का आवंटन ₹40,000 करोड़ तक बढ़ाया गया है। इससे EV में इस्तेमाल होने वाले चिप्स, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की लोकलाइजेशन तेज होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर बूस्ट : कैपिटल एक्सपेंडिचर को ₹12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाया गया है, जो पिछले साल से 11.4% ज्यादा है। नए हाईवे कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (दनकुनी-सूरत) और 20 नेशनल वॉटरवेज से लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम होगी। इससे ट्रक, कमर्शियल व्हीकल और कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की डिमांड बढ़ेगी। पूर्वोदय राज्यों के लिए 4,000 ई-बसेज का प्रावधान पब्लिक ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन को बढ़ावा देगा।
बायोगैस और CNG सपोर्ट : बायोगैस-ब्लेंडेड CNG पर बायोगैस हिस्से पर एक्साइज ड्यूटी छूट दी गई है। इससे CNG की रिटेल कीमत कुछ रुपये प्रति किलो कम हो सकती है और फॉसिल फ्यूल इंपोर्ट घटेगा।
एक्सपर्ट्स और इंडस्ट्री लीडर्स की प्रतिक्रिया
| घोषणा | विवरण | प्रभाव |
|---|---|---|
| PLI आवंटन | ₹5,940 करोड़ (2026-27) | घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और जॉब क्रिएशन बढ़ेगा |
| बैटरी कैपिटल गुड्स ड्यूटी छूट | मार्च 2028 तक बढ़ाई गई | EV बैटरी प्रोडक्शन कॉस्ट 10-15% तक कम हो सकती है |
| रेयर अर्थ कॉरिडोर | ओडिशा, केरल आदि में स्थापना | EV मोटर्स में मैग्नेट लोकलाइजेशन, इंपोर्ट पर निर्भरता घटेगी |
| कैपेक्स बढ़ोतरी | ₹12.2 लाख करोड़ | CV और ट्रक डिमांड में उछाल, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स तेज होंगे |
| ई-बस प्रोक्योरमेंट | 4,000 यूनिट पूर्वोदय राज्यों के लिए | पब्लिक EV मोबिलिटी और OEM कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ेगा |
ऑटोमोबाइल सेक्टर के प्रमुख नेताओं ने बजट को लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए सकारात्मक बताया है। SIAM प्रेसिडेंट और टाटा मोटर्स MD शैलेश चंद्रा ने कहा कि कैपिटल गुड्स पर ड्यूटी छूट और सेल्स पर कंसेशनल ड्यूटी का एक्सटेंशन EV इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। ACMA प्रेसिडेंट विक्रमपति सिंघानिया ने क्लीन मोबिलिटी पर फोकस को सराहा, जो कंपोनेंट इंडस्ट्री के लिए फायदेमंद है।
ओबेन इलेक्ट्रिक CEO मधुमिता अग्रवाल ने रेयर अर्थ मैग्नेट एक्सपैंशन और कॉरिडोर को इंपोर्ट डिपेंडेंसी कम करने वाला बताया। जेलियो ई मोबिलिटी को-फाउंडर कुणाल आर्य ने ड्यूटी रिडक्शन और ISM 2.0 को कॉस्ट कम करने वाला माना, लेकिन EV पर इनवर्टेड GST का मुद्दा उठाया। सिंपल एनर्जी CEO सुहास राजकुमार ने रेयर अर्थ कॉरिडोर को सप्लाई चेन वल्नरेबिलिटी दूर करने वाला कहा।
इंडस्ट्री का मानना है कि ये कदम EV की अफोर्डेबिलिटी बढ़ाएंगे और लोकलाइजेशन को 95% तक ले जाएंगे। हालांकि, कुछ एक्सपर्ट्स ने PLI फॉर बैटरी सेल्स/मोटर्स और GST रेशनलाइजेशन की मांग की है। कुल मिलाकर, बजट सेक्टर को ग्लोबल कॉम्पिटिटिवनेस और क्लीन मोबिलिटी में आगे बढ़ने का मौका देगा।
Disclaimer : यह एक समाचार रिपोर्ट है। जानकारी विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है और केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है।






