भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है, जहां छह दौर की वार्ता के बाद अब सिर्फ अंतिम मुहर की जरूरत बाकी है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि डील बहुत करीब है, लेकिन बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट समय लेगा। इससे भारतीय निर्यात को 850 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर मजबूत बढ़त मिलेगी, वैश्विक बाजारों के 55-60% हिस्से में तरजीही पहुंच सुनिश्चित होगी और प्रमुख क्षेत्रों जैसे कृषि उत्पाद, मसाले, चाय-कॉफी पर टैरिफ राहत से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
इंडिया-यूएस ट्रेड डील: अंतिम मुहर से पहले की ताजा स्थिति
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सोमवार को दिए बयान में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) अब पूरा होने के बेहद करीब है। छह दौर की गहन वार्ता के बाद दोनों पक्ष कई मुद्दों पर सहमति बना चुके हैं। अग्रवाल ने कहा, “यह डील बहुत करीब है, लेकिन हम कोई सटीक समयसीमा नहीं बता सकते। दोनों पक्ष तैयार होने पर ही यह होगा।” उन्होंने जोर दिया कि अमेरिका जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ व्यापक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) में समय लगना स्वाभाविक है, क्योंकि इसमें कई जटिल मुद्दों का समाधान जरूरी होता है।
वार्ता टीमों के बीच आखिरी मुद्दों पर वर्चुअल बैठकें जारी हैं। दिसंबर 2025 में अमेरिकी टीम ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और सचिव अग्रवाल से मुलाकात की थी, जिसके बाद दिसंबर के आखिरी सप्ताह में वाणिज्य मंत्री और यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के बीच वर्चुअल मीटिंग हुई। अग्रवाल ने कहा कि चर्चाएं कभी रुकी नहीं हैं और दोनों पक्ष जल्द से जल्द समझौते पर पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह समझौता मुख्य रूप से टैरिफ से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें अमेरिका ने हाल में 200 से ज्यादा कृषि और खाद्य उत्पादों को ऊंचे टैरिफ से छूट दी है। इससे भारतीय मसाले, चाय, कॉफी, नट्स और प्रोसेस्ड फूड्स की कीमत प्रतिस्पर्धी बनी रहेगी, जिससे निर्यात में बाधा कम हुई है।
निर्यात आंकड़े और प्रगति
दिसंबर 2025 में भारत का कुल माल निर्यात 1.87% बढ़कर 38.5 अरब डॉलर पहुंचा। अमेरिका को निर्यात पांच महीने के उच्चतम स्तर पर 7.01 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के 6.89 अरब डॉलर से ज्यादा है। ऊंचे टैरिफ के बावजूद यह सकारात्मक रुझान दिखाता है कि भारतीय उद्योग कम टैरिफ वाले क्षेत्रों पर फोकस कर रहा है और सप्लाई चेन मजबूत रखी है।
| वित्तीय वर्ष | कुल निर्यात (अरब डॉलर) | अमेरिका को निर्यात (दिसंबर 2025) | विकास दर |
|---|---|---|---|
| 2024-25 | 825 | – | – |
| 2025-26 (लक्ष्य) | 850+ | 7.01 (दिसंबर) | 1.87% (दिसंबर कुल) |
वाणिज्य सचिव ने कहा कि मौजूदा व्यापार समझौतों के पूरी तरह लागू होने पर भारतीय निर्यात को वैश्विक बाजारों के 55-60% हिस्से में तरजीही पहुंच मिल जाएगी। इससे निर्यात क्षमता मजबूत होगी और भारत 850 अरब डॉलर के वार्षिक लक्ष्य को आसानी से पार कर सकेगा।
सेक्टर-विशिष्ट प्रभाव और फायदे
समझौते से कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मसाले और पेय क्षेत्र सबसे ज्यादा लाभान्वित होंगे। अमेरिकी टैरिफ छूट से इन उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बहाल हुई है। ऊर्जा व्यापार भी अहम है, जहां भारत अमेरिका से तेल आयात बढ़ा रहा है, हालांकि मुख्य आयात मध्य पूर्व से होता है।
अग्रवाल ने कहा कि ट्रेड डील दोनों पक्षों की इच्छाशक्ति पर निर्भर है – “ट्रेड डील में दो पक्ष होते हैं, इसे आगे बढ़ाने के लिए दोनों का तैयार होना जरूरी है।” अन्य देशों के साथ एफटीए तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिनमें से कुछ इस साल अंतिम रूप ले सकते हैं।
नेतृत्व स्तर पर संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा, “मैं आपके प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं। वह शानदार व्यक्ति और मेरा दोस्त है। हम अच्छा डील करेंगे।” आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी कहा गया है कि यह समझौता इस साल पूरा होने की उम्मीद है, जो बाहरी मोर्चे पर अनिश्चितता कम करेगा और व्यापारिक स्थिरता बढ़ाएगा।
डिस्क्लेमर यह खबर उपलब्ध सूचनाओं और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। बाजार और नीतिगत फैसले बदल सकते हैं। निवेश या व्यापार संबंधी निर्णय से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।






