“आरबीआई की MPC बुधवार से तीन दिवसीय बैठक शुरू करेगी, जहां महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास पर फोकस रहेगा। रेपो रेट 6.5% पर स्थिर रहने की संभावना, क्योंकि खुदरा महंगाई 5.5% के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण कटौती मुश्किल, लेकिन लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर नए कदम संभव।”
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) बुधवार से अपनी तीन दिवसीय बैठक शुरू करने जा रही है, जिसमें रेपो रेट और अन्य नीतिगत दरों पर फैसला लिया जाएगा। वर्तमान में रेपो रेट 6.5 प्रतिशत पर स्थिर है, और बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इसमें कटौती की गुंजाइश बेहद कम नजर आ रही है। इसका मुख्य कारण खुदरा महंगाई दर (CPI) का 5.5 प्रतिशत के स्तर पर बने रहना है, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन और कमोडिटी प्राइस में उतार-चढ़ाव ने सतर्कता बढ़ा दी है।
बैठक में MPC के छह सदस्य- तीन आरबीआई के आंतरिक और तीन बाहरी विशेषज्ञ- आर्थिक आंकड़ों की समीक्षा करेंगे। हालिया डेटा दिखाता है कि जीडीपी ग्रोथ रेट चौथी तिमाही में 6.8 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, लेकिन कृषि क्षेत्र में मानसून की अनियमितता से चुनौतियां बनी हुई हैं। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) दिसंबर 2025 में 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि निर्यात में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई। इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में संतुलन बनाए रखने के लिए नीतिगत दरों में बदलाव की बजाय लिक्विडिटी टूल्स पर जोर दिया जा सकता है।
प्रमुख आर्थिक संकेतक और उनका प्रभाव
आरबीआई की नीति तय करने में ये फैक्टर अहम भूमिका निभाते हैं। नीचे एक टेबल में हालिया आंकड़े दिए गए हैं:
| संकेतक | वर्तमान स्तर (जनवरी 2026) | पिछले महीने का स्तर | प्रभाव पर नीति |
|---|---|---|---|
| खुदरा महंगाई (CPI) | 5.5% | 5.7% | उच्च स्तर से रेट कटौती मुश्किल |
| थोक महंगाई (WPI) | 3.8% | 4.1% | ईंधन और खाद्य कीमतों से दबाव |
| जीडीपी ग्रोथ | 6.8% (अनुमानित Q4) | 6.5% (Q3) | स्थिर ग्रोथ से सतर्क दृष्टिकोण |
| बैंक क्रेडिट ग्रोथ | 14.2% | 13.9% | मजबूत लेकिन ओवरहीटिंग का जोखिम |
| विदेशी मुद्रा भंडार | $650 बिलियन | $645 बिलियन | मजबूत स्थिति से स्थिरता |
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महंगाई नियंत्रण में प्रगति हुई है, लेकिन फूड इन्फ्लेशन 7.2 प्रतिशत पर बना हुआ है, जो सब्जियों और दालों की कीमतों से प्रभावित है। आरबीआई गवर्नर ने हालिया बयान में कहा कि नीति का फोकस “स्थिरता और विकास के बीच संतुलन” पर रहेगा।
रेपो रेट में कटौती क्यों नहीं?
विशेषज्ञों की राय में रेपो रेट कटौती की संभावना कम होने के पीछे कई कारण हैं:
वैश्विक अनिश्चितताएं : US Federal Reserve ने अपनी दरें 5.25 प्रतिशत पर रखी हैं, और यूरोपियन सेंट्रल बैंक भी कटौती से बच रहा है। इससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है, जो वर्तमान में 83.50 प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है।
घरेलू चुनौतियां : फिस्कल डेफिसिट 5.1 प्रतिशत के लक्ष्य पर है, लेकिन सब्सिडी बिल में बढ़ोतरी से सरकारी उधार बढ़ा है। इससे बॉन्ड यील्ड 7.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
क्रेडिट डिमांड : बैंकिंग सेक्टर में NPA रेशियो 3.5 प्रतिशत तक गिरा है, लेकिन MSME सेक्टर में लोन डिफॉल्ट बढ़ने से सतर्कता बरती जा रही है।
भविष्य के रिस्क : क्लाइमेट चेंज से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे महंगाई फिर बढ़ सकती है। आरबीआई का अनुमान है कि FY26 में महंगाई औसत 4.8 प्रतिशत रहेगी।
यदि रेपो रेट स्थिर रहता है, तो इसका असर होम लोन और कार लोन की EMI पर पड़ेगा, जो वर्तमान में 8.5-9 प्रतिशत की ब्याज दर पर उपलब्ध हैं। हालांकि, आरबीआई CRR या SLR जैसे टूल्स से लिक्विडिटी बढ़ा सकता है, जिससे बैंकों को ज्यादा लेंडिंग की सुविधा मिलेगी।
विशेषज्ञों की राय और बाजार की प्रतिक्रिया
बाजार में बैठक से पहले सेंसेक्स 82,000 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जबकि निफ्टी 24,500 पर है। ब्रोकरेज फर्मों जैसे HDFC Securities और ICICI Direct का अनुमान है कि रेट कटौती जून 2026 से पहले नहीं होगी। एक सर्वे में 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने कहा कि नीति “न्यूट्रल” स्टांस पर बनी रहेगी। यदि कोई सरप्राइज फैसला आता है, तो बॉन्ड मार्केट में उतार-चढ़ाव देखा जा सकता है।
आरबीआई की पिछली बैठक में रिवर्स रेपो रेट 3.35 प्रतिशत पर रखा गया था, और अब फोकस फॉरवर्ड गाइडेंस पर होगा। बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में गवर्नर आर्थिक आउटलुक पर विस्तार से बात करेंगे।
संभावित नीतिगत बदलाव
MPC इन क्षेत्रों पर फोकस कर सकती है:
डिजिटल करेंसी : CBDC के पायलट को विस्तार देने की योजना, जहां वर्तमान में 1 मिलियन से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो चुके हैं।
साइबर सिक्योरिटी : बैंकिंग फ्रॉड में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी से नए गाइडलाइंस जारी हो सकते हैं।
ग्रीन फाइनेंस : EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए स्पेशल लेंडिंग विंडो।
MSME सपोर्ट : लोन गारंटी स्कीम को 50,000 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
ये बदलाव अर्थव्यवस्था को बूस्ट दे सकते हैं, खासकर जब बेरोजगारी दर 7.2 प्रतिशत पर बनी हुई है। आरबीआई का लक्ष्य है कि FY26 में ग्रोथ 7 प्रतिशत तक पहुंचे।
बैठक के फैसले का असर स्टॉक मार्केट, बॉन्ड और करेंसी पर पड़ेगा। निवेशकों को सलाह है कि शॉर्ट-टर्म में वोलेटिलिटी से बचें और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट पर फोकस करें।
Disclaimer: यह न्यूज रिपोर्ट विभिन्न रिपोर्ट्स, टिप्स और सोर्सेज पर आधारित है।






